भारतीय हॉकी के लिए विदेशी कोच को गैर जरूरी बताते हुए पूर्व कप्तान और स्टार स्ट्राइकर धनराज पिल्लै ने कहा है कि वह राष्ट्रीय टीम के कोच बनने को तैयार हैं और उन्होंने एक साल में नतीजे देने का दावा भी किया।
धनराज ने कहा, ‘भारतीय हॉकी को विदेशी कोच की जरूरत नहीं है। विदेशी कोचों पर काफी पैसा बर्बाद हो रहा है लेकिन एथेंस ओलंपिक (2004) में गेरार्ड राक से लेकर लंदन ओलंपिक (2012) में माइकल नॉब्स तक नतीजा सिफर ही निकला है।
भारतीय हॉकी की स्थिति जस की तस है और हम विश्व कप में जगह बनाने को संघर्ष कर रहे हैं।’ ऑस्ट्रेलिया के माइकल नॉब्स को हटाए जाने के बाद से भारतीय हॉकी में देशी बनाम विदेशी कोच की बहस छिड़ी हुई है।
आस्ट्रेलियाई कोच रिक चार्ल्सवर्थ ने हाल ही में कहा है कि भारतीय कोच आधुनिक हॉकी की जरूरतों पर खरे नहीं उतरते।
राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतने वाली एयर इंडिया के कोच धनराज ने कहा, ‘मैं कहता हूं कि मुझे भारतीय हॉकी टीम का कोच बनाकर देखें।
मुझे अपनी शर्तों पर काम करने दिया जाए तो मैं एक साल में नतीजे देने का वादा करता हूं। पहले भी राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतने वाली टीमों के कोच को राष्ट्रीय कोच बनाया गया।
फिर वह सैड्रिक डिसूजा हो, वासुदेवन भास्करन, राजिंदर सिंह या हरेंद्र सिंह। फिर मुझे यह मौका क्यों नहीं दिया जा सकता।’