अपने जमाने के मशहूर ड्रैग फ्लिकर और पूर्व भारतीय कप्तान संदीप सिंह भी इसको लेकर चिंतित हैं।
संदीप ने कहा, ‘अब ड्रैग फ्लिक से गोल करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि प्रत्येक टीम का रक्षण मजबूत बन गया है। बचाव के बेहतर उपकरणों पहला रनर अब दौड़कर हिट को संभालने में नहीं हिचकिचाता है।’
उन्होंने कहा, ‘लेकिन अब भी गोंजालो पीलैट जैसे अच्छे फ्लिकर्स हैं जो अपनी ताकत और सटीकता से किसी भी रक्षण को छिन्न भिन्न कर सकते हैं।’
ड्रैग फ्लिक को लेकर यह चिंता अभी शुरू नहीं हुई। रियो ओलंपिक 2016 से ही पेनल्टी कार्नर पर कम गोल हो रहे हैं और हर टूर्नामेंट में इसकी संख्या में कमी आ रही है।
वर्तमान में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकर माने जाने वाले अर्जेंटीना के पीलैट ने कहा कि आपको रक्षकों को छकाने का तरीका ढूंढना होगा।
उन्होंने कहा, ‘यह इस पर निर्भर करता है कि अन्य टीम कैसे बचाव करती है। आप फ्लिकर्स से हर कोने से गोल करने की उम्मीद नहीं कर सकते हो। प्रत्येक ड्रैग फ्लिकर अन्य टीमों के रक्षण का अध्ययन करता है। आपको रक्षकों को छकाने का तरीका ढूंढना होता है।’
ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कोच कोलिन बैच ने कहा कि पेनल्टी कार्नर के गोल में बदलने की दर में कमी चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा, ‘हां, यह चिंता का विषय है। अब शॉर्ट कॉर्नर पर गोल करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। अब रक्षण काफी अच्छा हो गया है।’