भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने भारतीय ओलंपिक दल के इस वर्ष के लंदन दौरे पर फिजूलखर्ची की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि कुल 65 लाख रुपये से भी कम राशि लंदन ओलंपिक के लिए खर्च की गई और यह आंकड़ा हाल के समय में सबसे कम है। आईओए सचिवालय के मुताबिक 12 प्रतिनिधिमंडलों के रहने के इंतजाम में तो केवल 10 लाख रुपये ही खर्च हुए।
आईओए द्वारा जारी बयान के अनुसार, ‘‘पी’ श्रेणी के चार अधिकारियों को ओलंपिक खेलगांव में जगह नहीं मिल पाने के कारण उनके रहने पर चार लाख रुपये खर्च हुए। इनमें से दो-दो अधिकारी निशानेबाजी और टेनिस के थे। 12 लाख रुपये स्मृति चिन्हों, उपहार सामग्री और आधिकारिक बुकलेट आदि पर खर्च हुए क्योंकि इन पर खर्च उन राष्ट्रीय ओलंपिक संघों की ही जिम्मेदारी होती है जो दल को भेजता है।’
बयान के अनुसार समारोहों के लिए खिलाड़ियों और अधिकारियों को दी जाने वाली किट पर आईओए ने 17 लाख रुपये खर्च किए और इसी मद में बकाया 21 लाखपये का भुगतान सरकार कर रही है। खेलों के दौरान भारतीय दल का विविध खर्च पांच लाख रुपये था। खिलाड़ियों और अधिकारियों के जेब खर्च का प्रबंध सरकार करती है।
आईओए ने कहा कि नियमों के तहत राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों के अध्यक्ष और भारत के मौजूदा संदर्भ में आईओए के कार्यवाहक अध्यक्ष को दैनिक भत्ता पाने का अधिकार है। यह आधिकारिक और वैध है तथा संघ बेहद पारदर्शी तरीके से काम कर रहा है और उसके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। उसने कहा कि खातों का आडिट किया जा रहा है जिसके बाद इन्हें संस्था की वेबसाइट पर डाल दिया जाएगा।