मिजोरम का नाम देश को बेहतरीन फुटबॉल देने के लिए लिया जाता है। फुटबॉल के इस प्रदेश ने देश को 18 बरस की ललरेमसियामी के रूप में ऐसी बेहतरीन हॉकी स्ट्राइकर दी है, जिनका लोहा लंदन विश्व कप में दुनिया के हर हॉकी कमेंटटेर ने माना। अब तक भारत के लिए 30 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने वाली ललरेमसियामी ने बीते बरस महिला एशिया कप जिताने में ललरेमसियामी ने कप्तान रानी रामपाल और उपकप्तान सविता पूनिया के साथ अहम रोल निभाया।
लंदन विश्व कप में इटली के खिलाफ दागे बेहतरीन गोल के चलते सुर्खियों में रहीं। पहली बार भारत की एशियाई खेलों में नुमाइंदगी करने जा रही ललरेमसियामी ने पूरे जोश से कहा, 'हमारी टीम को लंदन महिला हॉकी विश्व कप में क्वॉर्टर फाइनल में शूटआउट में हारने का मलाल जरूर है। हम इसे भुलाकर बेहतरीन फिनिशिंग और हर मौकों को भुना गोल कर एशियाई खेलों खिताब जीतने के मकसद को हकीकत में तब्दील करने के भरोसे के जकार्ता जा रहे हैं।
हमारी टीम अति आत्मविश्वास से जरूर दूर है लेकिन उसे एशियाई खेलों में उसे खिताब जीतने का विश्वास जरूर है। रानी (रामपाल)दीदी, वंदना (कटारिया) दीदी सभी के साथ लंदन महिला हॉकी विश्व कप में खेलने में बहुत मजा आया। रानी, वंदना, उदिता, नवजोत और मैं आक्रामक हॉकी खेल कर बेहतर फिनिशिंग पर तवज्जो दी हैं। महिला हॉकी विश्व कप के बाद बेंगलुरू में चार दिन के शिविर के बाद मुझे भरोसा है कि एशियाई खेलों में हम पेनल्टी कॉर्नर का तो बेहतर ढंग से इस्तेमाल करेंगे ही मैदानी गोल भी पहले से ज्यादा करेंगे।'
भारत के लिए अब तक 169 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेल चुकीं 24 बरस की फु़लबैक दीपग्रेस एक्का ने गोल्ड कोस्ट गोल्ड राष्ट्रमंडल खेलों और लंदन महिला हॉकी विश्व कप में बहुत मुस्तैदी से टीम के किले की चौकसी की। दीपग्रेस एक्का बहुत चपल भले ही न हों, लेकिन वहे भारत की महिला हॉकी टीम के किले की अपनी साथी फुलबैक सुनीता लाकड़ा और दीपिका के साथ मिलकर बहुत मजबूती से करती हैं।
अपने दूसरे लगातार दूसरे एशियाई खेलों में शिरकत करने जा रही 24 बरस की ओडिशा की दीपग्रेस एक्का कहती हैं, 'हमारी टीम लंदन महिला हॉकी विश्व कप में क्वॉर्टर फाइनल में शूटआउट में मिली हार को भुला चुकी हैं। हमारी टीम का फोकस अब अब बेहतर फिनिशिंग के बूते ज्यादा मैदानी गोल कर इस बार एशियाई खेलों में सुनहरा तमगा जीतने पर है। विश्व कप के बाद बेंगलुरू में कैंप में तवज्जो हर मैच में गोल करने पर रहा।
हमारी कप्तान रानी रामपाल, वंदना कटारिया, ललरेमसियामी, नवजोत कौर सभी ने महिला विश्व कप में गोल करने के बहुत अभियान बनाए बस कमजोर फिनिशिंग के चलते अहम मौकों हम चूक गए। हमें पूरा भरोसा है कि हमारी फॉरवर्ड मैदानी गोल करने के साथ खूब पेनल्टी कॉर्नर भी बनाएंगी और हमारी टीम एशियाई खेलों में स्वर्ण के साथ लौटेंगी।'