भारतीय हॉकी में लंबे समय बाद सफलता की नई इबारत लिखी गई है। इस बार यह कारनामा कर दिखाया है भारत की जूनियर महिला हॉकी टीम ने।
'हॉकी के जादूगर' ध्यानचंद की विरासत को आगे बढ़ाते हुए भारतीय लड़कियों ने एफआईएच जूनियर विश्व कप में इंग्लैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से शिकस्त देते हुए पहली बार कोई पदक जीतने का कारनामा कर दिखाया।
मोनशेंग्लाबाख (जर्मनी) में कांस्य पदक पर कब्जा जमाने वाली भारतीय टीम का इससे पहले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2001 और 2009 में नौंवा स्थान हासिल करना रहा था।
पहली बार सेमीफाइनल में पहुंची भारतीय टीम को नीदरलैंड्स की टीम ने 3-0 से हरा दिया था।
निर्धारित समय तक मुकाबला 1-1 से बराबरी रहने के बाद मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट से कराया गया। हालांकि मिले 5-5 प्रयासों में दोनों टीमें 1-1 ही गोल कर सकीं। फिर सडन डेथ में रानी रामपाल और नवनीत कौर ने निशाने साध लिया जबकि इंग्लैंड को निराशा हाथ लगी।
भारत की ऐतिहासिक जीत में नवनीत कौर के गोल की महत्वपूर्ण भूमिका रही जिन्होंने सडन डेथ में भारत को 3-2 से आगे किया जबकि अन्ना तोमन चूक गईं। तोमन के चूकते ही भारतीय खिलाड़ी खुशी से उछल पड़ीं।
पहले हॉफ में रानी ने खेल के शुरुआत में 13वें मिनट में मैदानी गोल कर भारत को बढ़त दिला दी थी जो आधे समय तक कायम रही। लेकिन दूसरे हॉफ में 55वें मिनट में अन्ना तोमन ने मैदानी गोल से मैच को 1-1 से बराबरी दिला दी।
खिलाड़ियों को मिलेंगे एक-एक लाख
भारतीय महिलाओं के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद हॉकी इंडिया के सेक्रेटरी जनरल नरिंदर बत्रा ने पुरस्कारों की घोषणा करते हुए कहा, ‘भारतीय टीम को इस ऐतिहासिक जीत पर हार्दिक शुभकामनाएं। हॉकी इंडिया की ओर से इस शानदार जीत पर जूनियर महिला टीम की प्रत्येक खिलाड़ी को एक-एक लाख रुपए जबकि सपोर्ट स्टाफ के प्रत्येक सदस्य को 50 हजार रुपए बतौर इनाम दिया जाएगा। टीम के मुख्य कोच नील हावगुड को भी एक लाख रुपए दिए जाएंगे।’