भारत के पूर्व कप्तान और पूर्व सांसद दिलीप टिर्की कहते हैं कि भारतीय लड़कियां के लंदन महिला हॉकी विश्व कप के क्वॉर्टर फाइनल में हारने का यह सबसे बड़ा सबक है कि उसे शूटआउट में गोल करने के लिए वन टू वन स्थिति में 25 गज की रेखा से आठ सेकंड के भीतर गोल करने के लिए बेहतर ड्रिबल की जरूरत है।
वह कहते हैं, 'मुझे गोलरक्षक सविता पूनिया के शूटआउट के शुरू में दो बेहतर बचावों के बावजूद रानी रामपाल, मोनिका मलिक और नवजोत कौर के गोल करने के मौके चूकने का इसलिए बेहद अफसोस है कि हमारी लड़कियां इसके चलते सेमीफाइनल में स्थान बनाने और इतिहास दोहराने से चूक गईं। हमारी रक्षापंक्ति ने बेहद मुस्तैद खेल दिखाया। हमारी लड़कियों ने दिखाया कि एशिया में वे सबसे बेहतर हैं लेकिन दुनिया की शीर्ष टीमों का मुकाबला करने के लिए उन्हें उन्हें अभी और मेहनत करने की जरूरत है। एशियाई खेलों में भारत को सुनहरी कामयाबी हासिल करने में जरूर दिक्कत नहीं आनी चाहिए। हमारी लड़कियों ड्रिबल और मैदानी गोल करने पर पर वन टू वन की स्थिति में बेहतर सूझबूझ की जरूरत है। साथ ही पेनल्टी कॉर्नर पर इनडायरेक्ट गोल करने की राह भी तलाशनी होगी क्योंकि ड्रैग फ्लिकर के रूप में भारत के पास अकेली गुरजीत कौर हूं।’