कप्तान और दुनिया के बेहतरीन गोलरक्षकों में एक पीआर श्रीजेश के साथ पूरी भारतीय पुरुष हॉकी टीम 19 अगस्त से जकार्ता में शुरू होने वाले एशियाई हॉकी खेलों में अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखने के लिए बेंगलुरु में चल रहे आखिरी तैयारी शिविर में जुटी है।
चीफ हॉकी कोच हरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में टीम इन खेलों से पहले तीन हॉकी टेस्ट सीरीज में जो मामूली खामियां रही उनसे निजात पाने में जुटी है। भारतीय हॉकी टीम का फोकस एशियाई खेलों से पहले खासतौर पर डी में बेहतर फिनिशिंग पर है।
पीआर श्रीजेश ने 'अमर उजाला' से कहा, 'हमारी टीम एशियाई खेलों के लिए विश्वास से भरी है। हमारी पुरुष टीम एशियाई खेलों में भले ही मौजूदा चैंपियन है लेकिन, इसमें चुनौती कभी आसान नहीं होती है क्योंकि हर टीम की शैली अलग होती है। जिस शिद्दत से भारतीय टीम ने मेहनत की है उससे मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी टीम स्ट्रक्चर पर काबिज रह हम इस बार भी एशियाई खेलों में स्वर्ण पर कब्जा बरकरार रखने में कामयाब होगी।'
वह बताते हैं, 'हमारी टीम के लिए हर खिलाड़ी मालूम है कि एशियाई खेलों में हमारे लिए खिताब पर कब्जा इसलिए अहम है क्योंकि यह हमें यह सीधे टोक्यो ओलंपिक का टिकट दिला देगा। एशियाई खेलों में उम्मीदों का ज्यादा दबाव रहता है। एशियाई खेलों के लिए हम पर खिताब कायम रखने का दबाव होगा। हमारे पास पेनल्टी कॉर्नर को भुनाने के लिए चार ड्रैग फ्लिकर हैं -रूपिंदर, हरमनप्रीत सिंह, वरुण कुमार और अमित रोहिदास हैं। संयोग से ये चारों बहुत मुस्तैदी से भारत की किले की चौकसी की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हैं, और इससे मुझ पर दबाव काफी कम होता है। हमारी टीम की अग्रिम पंक्ति, मध्यपंक्ति और रक्षापंक्ति के बीच बेहतरीन तालमेल उसे मैदान पर बेहतरीन प्रदर्शन को प्रेरित करती है।'
श्रीजेश कहते हैं, 'एफआईएच रैंकिंग में एक पायदान उपर चढ़ कर पांचवें स्थान पर पहुंचने से हमें एशियाई खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने का हौसला मिलेगा। रैंकिंग में जितने पायदान टीम उपर चढ़ती पर उस पर उतना ही और बेहतर प्रदर्शन करने की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। हमारी टीम के एशियाई खेलों में मध्यपंक्ति में सरदार सिंह, रक्षापंक्ति में वीरू (वीरेन्द्र लाकड़ा) और रूपिंदर पाल तथा अग्रिम पंक्ति में आकाशदीप का अनुभव अतिरिक्त ऊर्जा देगा क्योंकि ये सभी दबाव को झेलना जानते हैं। इनका अनुभव टीम के नौजवान खिलाडियों को दबाव में मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने में मदद करेगा। हमारी टीम के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि हममें ज्यादातर लंबे समय से साथ साथ खेल रहे हैं और सभी के बीच बेहतरीन तालमेल है। हमारे पास ऐसा कोर ग्रुप है जिसमें किसी की भी कोई भी कभी जरूरत पडने पर जगह भर सकता है। हम मैच दर मैच खेल बेहतर और बेहतर करने की कोशिश करेंगे और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के अपने मकसद को पाकर सीधे ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने में कामयाब होंगे।’