भारतीय महिला हॉकी टीम ने हाल ही में एशिया कप में शक्तिशाली चीन को हराकर खिताब जीता है। जीतने के बाद टीम की हर सदस्य को एक-एक लाख रुपए का इनाम दिए जाने की घोषणा की गई है। इसी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया को एक लाख जरूर मिल जाएंग लेकिन इससे जीवन के दिन काटना मुश्किल हैं। सवित पूनिया को पिछले 9 साल से नौकरी का इंतजार है। चीन के साथ फाइनल अंतिम समय तक बराबरी पर था। बाद में पेनाल्टी शूट आउट के जरिए विजेता का फैसला किया गया। इसमें भारत ने बाजी मार ली। भारत ने 5-4 से मैच अपने नाम किया। पेनाल्टी शूट आउट के समय आपका गोलकीपर सबसे अहम हो जाता है। एशिया कप के फाइनल में गोलकीपर सविता पूनिया ने शानदार खेल दिखाकर देश को 13 साल बाद एशिया का चैंपियन बनाया। लेकिन पूनिया को खुद पिछले नौ सालों से नौकरी का इंतजार है।
2008 में हॉकी में पदार्पण करने वाली पूनिया ने एशिया कप के दौरान अपना 150 वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। नौ साल के लंबे करियर के बाद भी उन्हें अभी तक नौकरी नहीं मिल सकी है। देश का प्रतिनिधित्व करने वाली पूनिया का जब यह हाल है तो अन्य क्षेत्रों की महिलाओं का अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है। हरियाणा की सिरसा की सविता पूनिया ने कहा कि मेरी उम्र 27 वर्ष हो चुकी है। पिछले नौ सालों से मुझे नौकरी का इंतजार है। हरियाणा की 'मेडल लाओ, नौकरी पाओ' योजना के तहत मुझे उम्मीद थी, लेकिन वहां भी सिर्फ मुझे आश्वासन ही मिला। सविता ने कहा कि अभी भी वह अपना खर्च अपने माता-पिता से ले रही हैं। इसका उन्हें अफसोस है।