सरदार सिंह की ‘सरदारी’ में भारत ने सांस रोक देने वाले अत्यंत रोमांचक मुकाबले में भारत ने 0-2 से पिछड़ने के बाद बाजी पलटते हुए रविवार को नीदरलैंड को शूटआउट में 3-2 से हरा कर हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल में कांस्य पदक जीत लिया। निर्धारित समय तक दोनों टीमें पांच पांच से बराबर रही।
भारत की इस जीत में मनप्रीत सिंह की सूझबूझ और गोलरक्षक पीआर श्रीजेश की मुस्तैदी भी खूब दिखी। दरअसल यह किसी एक नहीं बल्कि ‘भारतीय टीम’ की जीत थी। भारत ने 1982 में चैंपियंस ट्रॉफी में एम्सटर्डम में पाकिस्तान को 5-4 से हरा कर कांसा जीतने के बाद किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में यहां पदक जीता।
निर्धारित समय के खत्म होने से पांच सेकंड में मिंक वॉन डेर वीरडन ने छठे पेनल्टी कॉर्नर पर गोल कर अपनी हैट-ट्रिक पूरी कर नीदरलैंड को 5-5 की बराबरी दिला दी। निर्धारित समय मे नीदरलैंड के लिए माइक्रो प्रूजर और निएक वान डेर शूट ने एक-एक गोल किया। भारत के लिए पूरे टूर्नामेंट में नाकाम रहने वाले रमणदीप सिंह और रूपिंदर पाल सिंह ने दो-दो और एक गोल आकाशदीप सिंह ने किया।