भारतीय पुरुष हॉकी टीम को रविवार को क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम की टीम से टक्कर लेनी है। भारतीय टीम के पास जीत दर्ज कर 36 साल बाद सेमीफाइनल में प्रवेश करने का मौका है।
इससे पहले भारतीय टीम 1980 मास्को ओलंपिक में सेमीफाइनल में पहुंची थी। भारतीय टीम को न केवल अपनी गलतियों पर काबू पाना होगा बल्कि खेल का स्तर भी उठाने की जरूरत होगी।
भारतीय टीम ने नॉकआउट में प्रवेश कर शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन उसे ओलंपिक पदक हासिल करने की पुरानी हसरत पूरी करने के लिए जीत के कदम और आगे बढ़ाने की जरूरत है। भारत पूल-बी में दो जीत, एक ड्रॉ और दो हार के साथ 7 अंक लेकर चौथे स्थान पर रहा।
दूसरी ओर, बेल्जियम ने ग्रुप-ए में पांच में से चार मैच जीतकर शीर्ष स्थान हासिल किया है। रेड लायंस बेल्जियम की टीम ने अपना एकमात्र मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ 1-3 से गंवाया है। अगर विश्व रैंकिंग की बात करें तो भारत पांचवें और बेल्जियम की टीम छठे स्थान पर है।
बेल्जियम ने ग्रुप मैच में विश्व चैंपियन और स्वर्ण पदक की दावेदार ऑस्ट्रेलिया के अलावा स्पेन और ब्रिटेन को भी हराया है। दूसरी ओर भारतीय टीम को अंतिम क्वार्टर में अपने रक्षण को मजबूत करने की जरूरत होगी।
जर्मनी के खिलाफ भारतीय टीम अंतिम तीन सेकेंड में गोल खाकर हार गई थी। दुनिया में 15वें नंबर की टीम कनाडा ने भी अंतिम दस मिनट में गोल कर भारतीय टीम को 2-2 से बराबरी पर रोक लिया। कनाडा के खिलाफ भारतीय स्ट्राइकर एस वी सुनील की कलाई में चोट लग गई थी लेकिन भारतीय कप्तान पी आर श्रीजेश का कहना है कि वह फिट हैं और बेल्जियम के खिलाफ उतरेंगे।