इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (एफआईएच) के अध्यक्ष लियोंद्रो नेग्रे वर्ल्ड हॉकी लीग राउंड-2 के शुरू होने से पहले ही एक नहीं कई मौकों पर कहते आए हैं बांग्लादेश को हल्के में नहीं लीजिए। वहां हॉकी बहुत लोकप्रिय है और अब उनकी टीम भी अच्छी है।
भारतीय कप्तान सरदार सिंह भी कुछ ऐसी ही बात कह चुके हैं। ठीक वैसा ही बांग्लादेश ने रविवार को मेजर ध्यानचंद स्टेडियम पर वर्ल्ड हॉकी लीग-2 के अंतिम मुकाबले में करके दिखाया। हालांकि भारत के पक्ष में जाता 5-1 का गोल अंतर मैच की असली कहानी नहीं कहता है।
बांग्लादेशी गोलकीपर व डिफेंडरों ने छह से सात निश्चित गोल बचाए। इस जीत के साथ ही पुरुष टीम न सिर्फ अजेय रही बल्कि सर्वोच्च रहते हुए आसानी से वर्ल्ड हॉकी लीग के राउंड तीन में पहुंच गई।
अब तक इस लीग में यही देखा गया जब भी भारतीय टीम उतरी पहला पेनाल्टी कार्नर और गोल उसके हिस्से में आया। लेकिन आज कहानी दूसरी थी। पांचवें मिनट में पेनाल्टी कार्नर बांग्लादेश को मिला। जिसे ममूनुर रहमान ने गोल में बदल भारत को पहली बार इस टूर्नामेंट पीछे धकेला।
बेहद तेज गति से खेले गए इस मुकाबले में मेजबानों को 15वें मिनट में बराबरी मिली 25 गज की रेखा से रूपिंदर की तेज हिट पर डी में दानिश मुजतबा को स्टिक लगाने की जरूरत थी। यह बांग्लादेश के कप्तान और गोलकीपर मुहम्मद जाहिद होसैन थे जिन्होंने तीन से चार निश्चित गोल बचाए।
कोच नॉब्स भारतीयों के प्रदर्शन बुरी तरह झल्लाए नजर आए। एकबारगी तो उन्होंने गुस्से में अपनी कैप उतार कर फेंक दी। 31 मिनट में दूसरे पेनाल्टी कार्नर पर रूपिंदर ने 2-1 की बढ़त दिलाई। पहले हॉफ में यही स्कोर रहा।
दूसरे हॉफ में कोच की डांट का असर भारतीयों पर दिखा उन्होंने 22 मिनट तक बांग्लादेशियों को अपने सर्किल में नहीं आने दिया। इस दौरान हरबीर संधू के पास पर आकाशदीप ने 46वें मिनट में 57वें मिनट में मलक सिंह ने व 62वें मिनट में दानिश मुजतबा ने एक और गोल किया। अंत में वही मैन ऑफ द मैच बनें।
दूसरे हॉफ में भारत को पांच पेनाल्टी कार्नर मिले लेकिन सभी बेकार गए। सरदार सिंह को मैन ऑफ द टूर्नामेंट के रूप में दो लाख रुपये मिले। जबकि आठ गोलों के साथ संयुक्त रूप से टॉप स्कोरर रहे वी रघुनाथ को सर्वश्रेष्ठ डिफेंडर चुना गया।