वह कहते हैं, ' भारत की मौजूदा हॉकी में हालांकि अनुभव और परिपक्वता की कमी दिखती है। सरदार सिंह का हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहना और चोट के कारण एस वी सुनील और रमणदीप सिंह कर उपलब्ध नहीं रहना ओडिशा हाकी विश्व कप में भारत को अखरेगा। ये सभी अनुभवी खिलाड़ी इस बार विश्व कप के लिए भारतीय टीम में रहते तो अच्छा होता। विश्व कप के लिए जिस जोश और अनुभव की जरूरत होती है वह इस बार विश्व कप में शिरकत करने जा रही भारतीय टीम में कम दिखाई देता है।'
राजिंदर सिंह कहते हैं, 'भारतीय हॉकी खिलाड़ी बराबर शिविर में रहते हैं। उन पर उनकी क्षमता से ज्यादा दबाव रहता है। खिलाड़ी पर उसकी क्षमता के मुताबिक ही दबाव डालना जाना चाहिए। इस तरह के ज्यादा दबाव में अक्सर खिलाड़ी चोट खाकर बाहर हो जाते हैं। भारतीय हॉकी टीम को विश्व कप की तैयारी के लिए हर तरह की बेहतरीन सुविधाएं मिली है। भारतीय टीम को खुद को तैयार करने के लिए पर्याप्त एक्सपोजर मिला है। हर तरह की बेहतरीन ट्रेनिंग और खान-पान की उसके लिए बराबर व्यवस्था हुई।
'अंतर्राष्ट्रीय हॉकी संघ (एफआईएच) के अध्यक्ष भी भारतीय हैं। अब तो हॉकी में रोलिंग सब्सिटयूशन का जमाना है और यह भारत के लिए खासे फायदे का सौदा है। अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में आज दुनिया भर की टीमें तकनीकी और रणनीतिक रूप से उतनी मजबूत नहीं है जितने हमारे दौर में हुआ करती थीं। ऑस्ट्रेलिया , अर्जेंटीना, बेल्जियम, जर्मनी, इंग्लैंड और भारत जैसी हॉकी की दुनिया की शीर्ष टीमों में ताकत के लिहाज से अंतर बहुत कम हुआ है। हकीकत यही है जीत में कौशल के साथ किस्मत का रोल भी होता है।'