भारत का खाता मैच के महज 13वें सेकंड में गुरजंत सिंह ने उसके हॉकी इतिहास का सबसे तेज गोल कर खोला। इससे पहले भारत के लिए सबसे तेज गोल अजित सिंह के नाम था, जो उन्होंने मांट्रियल ओलंपिक में अर्जेंटीना के खिलाफ किया था। दुनिया में हॉकी के इतिहास में सबसे तेज गोल मैच में दसवें सेकंड में दागा गया। भारत के लिए पहले और पांचवें पेनल्टी कॉर्नर पर रूपिंदर पाल ने दो गोल दागे। एक-एक गोल मनदीप और ललित उपाध्याय ने किया।
वहीं नीदरलैंड के लिए जिप जेनसन ने पहले पेनल्टी कॉर्नर पर और अनुभवी स्ट्राइकर और ड्रैग येरोन हर्टजबर्गर ने एक मैदानी गोल किया। नीदरलैंड को मैच में कुल नौ पेनल्टी कॉर्नर मिले और वह महज पहले को छोड़ कर एक को भी नहीं भुना पाया। दरअसल यह मुकाबला भारत की अग्रिम पंक्ति और नीदरलैंड की मध्यपंक्ति के बीच था। इसमें पहली बाजी भारत के हाथ रही।
दूसरे क्वार्टर से पहले नीदरलैंड ने 2-2 से बराबरी कर ली थी। मनदीप सिंह ने हाफ टाइम के बाद तीसरे क्वार्टर में मनप्रीत सिंह के पास पर जमीनी शॉट जमाकर भारत को 3-2 से आगे कर दिया। ललित उपाध्याय ने 37वें मिनट में 4-2 से आगे कर दिया। रूपिंदर पाल सिंह ने चौथे और आखिरी क्वार्टर के पहले ही मिनट में मैच के पांचवें कॉर्नर पर मैच का अपना दूसरा गोल कर उसकी बढ़त 5-2 कर दी। नीदरलैंड को इसके बाद दो और पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन वह इन्हें भी गोल में नहीं बदल पाया।
अमित ने भारत के लिए बतौर रशर अमित रोहिदास की तारीफ करनी होगी जिन्होंने बेहतरीन पूर्वानुमान लगाते हुए नीदरलैंड के ड्रैग फ्लिकर जेरोन हर्टजबर्गर के आधा दर्जन से ज्यादा पेनल्टी कार्नर पर खतरनाक फ्लिक को रोक यहां विश्व कप क्वार्टर फाइनल में इसी टीम के खिलाफ आखिरी क्षणों की गलत का दाग भी बहुत हद तक धो दिया।