बांग्लादेश की राजधानी ढाका में खेले एशिया कप के फाइनल मुकाबले में भारत ने मलेशिया को 2-1 के अंतर से मात देकर तीसरी बार एशिया कप खिताब अपने नाम कर लिया। साल 2013 में कोरिया के हाथों फाइनल में खिताब गंवाने वाली टीम इंडिया ने इस बार टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया औऱ पूरी प्रतियोगिता में अपराजित रही।
भारतीय हॉकी टीम ने एशिया कप में अपना डंका बजा दिया। फाइनल में मलयेशिया को 2-1 से हराने वाली भारतीय टीम ने सात मैचों में सिर्फ एक ड्रॉ खेला और छह जीत दर्ज की। इस टूर्नामेंट में शीर्ष रैंकिंग की टीम ने अपने रुत्बे और काबलियत का लोहा मनवा दिया। भारतीय हॉकी टीम के नए कोच सोएर्ड मारिन के मार्गदर्शन में यह टीम की पहली जीत है। हरमनप्रीत ने टूर्नामेंट में कुल सात गोल किए जिसमें जापान और बांग्लादेश के खिलाफ किए दो-दो गोल शामिल हैं। ग्रुप में ए में टॉप पर रहने के बाद सुपर फोर में पहुंची टीम इंडिया ने अपने आखिरी मुकाबले में पाकिस्तान को 4-0 के अंतर से मात देकर फाइनल में जगह पक्की की थी। सुपर फोर में कोरिया के साथ उसने 1-1 से ड्रा खेला थे। इसके अलावा अन्य सभी मैचों में भारत ने जीत हासिल की थी।
फाइनल मुकाबले के तीसरे ही मिनट में भारतीय टीम ने जोरदार हमला बोला जब एस वी सुनील के तेजतर्रार क्रास पर गोलपोस्ट से लगकर रिबाउंड हुई गेंद पर रमनदीप ने गोल कर दिया। भारतीय टीम अगले ही मिनट में एक गोल और कर लेती लेकिन चिंगलेनसाना का शॉट करीबी अंतर से रह गया। मलेशिया ने 13वें मिनट में पहला पेनाल्टी कॉर्नर लिया लेकिन वह बेकार गया। भारत को मिले पहले पेनाल्टी कॉर्नर पर हरमनप्रीत के प्रयास पर डिफेंडर रेजी रहीम ने बिल्कुल गोललाइन पर बचाव कर लिया था। मलयेशियाई गोलकीपर कुमार सुब्रहमण्यम ने भी दो बार अच्छे बचाव किए।
पहले आकाशदीप और फिर अमित रोहिदास के प्रयासों को विफल किया। मध्यांतर से पहले ललित ने भारत की बढ़त दोगुनी कर दी। दूसरे हाफ में कड़ी टक्कर देने वाली मलयेशियाई टीम को सबाह ने 50वें मिनट में बराबरी दिला दी। अंतिम तीन मिनट में मलयेशिया ने अपने गोलकीपर को भी अतिरिक्त खिलाड़ी के तौर पर आजमाने की रणनीति अपनाई लेकिन भारतीय टीम को एशिया कप जीतने से नहीं रोक सके।