हैंडशेक को लेकर क्या है रुख?
क्रिकेट में हाल के मुकाबलों में भारतीय टीम ने मैच से पहले और बाद की पारंपरिक हैंडशेक प्रक्रिया से दूरी बनाई है। हालांकि, हॉकी में स्थिति अलग रही है। हॉकी इंडिया ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि वह क्रिकेट की राह पर नहीं चलेगा और ओलंपिक चार्टर तथा अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) के दिशा-निर्देशों का पालन करेगा। हालांकि, हाल ही में एफआईएच प्रो लीग के मुकाबलों और जूनियर स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों को मैच से पहले हाई-फाइव करते देखा गया है।
क्या कहते हैं नियम?
क्रिकेट की तरह हॉकी में भी खिलाड़ियों को हैंडशेक करने के लिए बाध्य करने वाला कोई विशेष नियम नहीं है, लेकिन मैच से पहले और बाद में हाथ मिलाना खेल भावना से जुड़ी एक पारंपरिक परंपरा है, जिसे सामान्य खेल भावना, अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) और ओलंपिक चार्टर के सिद्धांतों के तहत देखा जाता है।
हॉकी में प्रोटोकॉल और नियम
- हैंडशेक अनिवार्य नहीं: एफआईएच की आधिकारिक नियमावली में ऐसा कोई औपचारिक नियम नहीं है, जिसके तहत खिलाड़ियों के लिए हाथ मिलाना अनिवार्य हो या ऐसा नहीं करने पर कोई कानूनी दंड दिया जाए।
- खेल भावना की परंपरा: मैच से पहले लाइन-अप, हाथ मिलाना और हाई-फाइव खेल भावना तथा निष्पक्ष खेल से जुड़ी पारंपरिक प्रक्रियाओं का हिस्सा हैं।
- हॉकी इंडिया का रुख: हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया है कि वह ओलंपिक चार्टर के सिद्धांतों का पालन करता है और खिलाड़ियों को विरोधी टीम के खिलाड़ियों से बातचीत या मेलजोल करने से नहीं रोकता।