दुनिया के शीर्ष गोलरक्षकों में शुमार पीआर श्रीजेश का कहना है कि टीम क्वार्टर फाइनल की चुनौती के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने ‘अमर उजाला’ से कहा कि चाहे जो भी टीम सामने हो मेरा लक्ष्य गोल की पूरी मुस्तैदी से हिफाजत कर टीम को जीत दिलाना है।
मैंने कनाडा के खिलाफ एक गोल जरूर खाया पर फॉरवर्ड दनादन गोलकर टीम को जीत दिलाने में सफल रहे। मेरे लिए टीम की जीत अहम है फिर वह मेरे गोल रोकने से मिले या फिर साथियों के गोल करने से। मेरा यह तीसरा विश्व कप है। टीम ने इससे पहले दोनों विश्व कप में भी अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन तब हम छोटी-छोटी गलतियों के चलते पदक से दूर रह गए। पहले पूल में शीर्ष पा रहने वाली दो-दो टीमें सेमीफाइनल खेलती थी। इस बार फॉर्मेट में क्वॉर्टर फाइनल हैं। ऐसे में चुनौती अलग किस्म की है। हमारे लिए अच्छी बात यह है कि बीरू (बीरेन्द्र लाकड़ा) पूरी तरह फिट हैं और वह मेरे साथ किले की मुस्तैदी से हिफाजत कर रहे हैं। युवा फॉरवर्ड ने अब तक दमदार प्रदर्शन किया है।
तीन मैचों में खाए तीन गोल
श्रीजेश ने तीन मैचों में तीन गोल खाए हैं, लेकिन आलोचकों ने यह कहना शुरू कर दिया है उनके रिफलेक्सिस धीमे हो गए हैं। वह कहते हैं गोलरक्षक के रूप में आप हमेशा निशाने पर होते हैं। आपकी हर हरकत पर प्रतिद्वंद्वी ही नहीं आपकी टीम की भी नजर रहती है। जहां तक मेरे गोल खाने की बात है तो यह मायने नहीं रखता कि गेंद कहां से गोल में गई। मेरे पिता को दिल की तकलीफ थी जो अब ठीक हैं। खिलाड़ियों के परिवार में भी दिक्कत-परेशानी आती है। जब मैदान पर भारतीय टीम के गोलरक्षक के रूप में उतरता हूं तो मैं सब कुछ भूल कर बॉर्डर पर फौजी की तरह सिर्फ अपने किले (गोल) की चौकसी की बाबत सोचता हूं।
पूर्व गोलकीपर आशीष बलाल का कहना है कि, '
श्रीजेश भारत ही नही दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गोलरक्षकों में से एक हैं। वह अभी तीन-चार बरस और खेल सकते हैं। टीम को शीर्ष पांच में पहुंचाने में अहम योगदान देने वाले श्रीजेश समय आने पर आलोचकों को गलत साबित कर देेंगे। क्वार्टर फाइनल से पहले उनका हौसला बढ़ाने की जरूरत है।‘
पूर्व ओलंपियन जोकिम कारवाल्हो ने कहा कि,
'श्रीजेश इस समय भी भारत के सबसे मजबूत प्रहरी हैं। एक या दो मैच में ढीले प्रदर्शन से आप यह नहीं कह सकते कि वह अब कमजोर पड़ गए हैं। गोलरक्षक अपने अनुभव से और बेहतर होता है। श्रीजेश भी अपने अनुभव के कारण बेहतर हुए हैं।'