देश में एस्ट्रो टर्फ के अकाल की बात आज से कुछ वर्ष पूर्व समझ में आती थी। लेकिन कई सेंटरों में स्तरीय टर्फ होने के बावजूद टीमों को स्तरहीन टर्फ पर तैयारियां कराना समझ से परे है।
बंगलूरू में ओलंपिक के लिए पुरुष हॉकी टीम को घिसी टर्फ पर तैयारियां कराने के बावजूद हॉकी इंडिया ने सबक नहीं लेते हुए जूनियर महिला हॉकी टीम को भोपाल की फटी और रिजेक्ट हो चुकी टर्फ पर तैयारियां करवाई।
खिलाड़ियों के चोटिल होने की घटनाएं बढ़ीं तो उन्होंने विरोध शुरू किया। नतीजतन बृहस्पतिवार से बैंकाक में शुरू हुई जूनियर एशियाई चैंपियनशिप के लिए एक सप्ताह पहले ही टीम को दिल्ली बुला लिया गया।
सच्चाई यह है कि इस टर्फ को हॉकी इंडिया के चयनकर्ता भी रिजेक्ट कर चुके हैं। यहां तक कि उन्होंने कैंप शिफ्ट करने की भी सिफारिश की है। गोलकीपिंग वाले स्थान पर टर्फ फट चुकी है। कई स्थानों पर काई जमी होने के साथ यह घिस भी चुकी है।
यही नहीं टर्फ पर बनाई जाने वाली लाइनों पर ब्रश पेंट किया गया है। जिससे यह स्थान पूरी तरह ठोस हो गया है। टर्फ की यह हालत होने के चलते कई खिलाड़ियों को एंकल स्प्रेन की समस्या आई है। इनमें कुछ इस वक्त बैंकाक में खेल रही हैं जबकि कई को टीम से हाथ धोना पड़ा।
सच्चाई यह है कि उक्त टूर्नामेंट जूनियर वर्ल्ड कप का क्वालीफाइंग है और ब्रांड न्यू टर्फ पर खेला जाना है। हालांकि 2013 जूनियर वर्ल्ड कप की मेजबानी भारत को मिल रखी है लेकिन एचआई और आईएचएफ के झगड़े के चलते एफआईएच पहले भी भारत से चैंपियंस ट्राफी की मेजबानी छीन चुका है। ऐसे में इस वर्ल्ड कप की गारंटी नहीं है।
इस बात को ध्यान में रखें तो भारत को चीन, जापान, कोरिया जैसी टीमों के बीच फाइनल में हर हाल में स्थान बनाना होगा। इन महत्वपूर्ण तथ्यों के बावजूद टीम की तैयारियां इस तरह की टर्फ पर कराई गईं।
टर्फ की शिकायतें ज्यादा हो गईं तो हॉकी इंडिया ने बैंकाक रवाना होने से एक सप्ताह पहले दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में बुला लिया जहां खिलाड़ी पुरानी से नई टर्फ पर सामंजस्य बिठाने को जद्दोजहद करते रहे।