लंदन ओलंपिक और उससे पहले ब्लू टर्फ को लेकर इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (एफआईएच) ने भले अभियान चलाया हो। लेकिन अब इसी एफआईएच ने साई और हॉकी इंडिया की दुविधा दूर करते हुए साफ कर दिया है कि ग्रीन टर्फ की हॉकी की दुनिया से विदाई नहीं हुई है। हॉकी की सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय संस्था ने कह दिया है कि दोनों ही रंगों की टर्फें बिछाई जा सकती हैं। लेकिन उनका मानकों पर खरा उतरना जरूरी है। दरअसल टर्फ के रंग को लेकर साई और हॉकी इंडिया में मतभेद सामने आ गए थे। लेकिन एफआईएच ने अब स्थिति स्पष्ट कर दी है।
बंगलूरू और भोपाल के टर्फ बेकार हो चुके हैं। माइकल नॉब्स और महिला टीम के कोच सीआर कुमार खराब टर्फ के चलते यहां से कैंप हटवा चुके हैं। हॉकी इंडिया ने बंगलूरू में दो औरभोपाल में ब्लू टर्फ बिछाने का प्रस्ताव साई को दिया। लेकिन रंग को लेकर बात बिगड़ गई। सूत्रों के मुताबिक साई का कहना है कि ब्ल्यू टर्फ को लेकर भारतीय टीम के कोच माइकल नॉब्स की रिपोर्ट अच्छी नहीं आई है। लंदन ओलंपिक के दौरान भी नॉब्स ने कहा था कि ब्ल्यू टर्फ के चलते खिलाड़ियों को चोटों का सामना करना पड़ा है।
साई ने तर्क दिया कि महंगी होने के चलते इसे बिछा भी लिया जाए और बाद में गड़बड़ हो जाए तो काफी रुपया बर्बाद जाएगा। जबकि हॉकी इंडिया का कहना है कि देश भर में साई के पास कोई ब्ल्यू टर्फ नहीं है। इस टर्फ पर हॉकी का खेला जाना तय है। जिसके चलते इसी टर्फ को इन सेंटरों पर बिछाया जाना चाहिए। साई की पहल पर एफआईएच से स्पोर्ट्स हेड रोजर वेब ने उन्हें जवाब दिया कि इस समय उनकी ओर से किसी एक टर्फ को प्रस्तावित नहीं किया जा रहा है।
उनके इस जवाब से साफ हो गया है कि ग्रीन टर्फ से हॉकी की विदाई नहीं होने जा रही है। हालांकि हॉकी इंडिया ने उक्त सेंटरों पर ब्ल्यू टर्फ बिछाने को ही कहा है लेकिन साई की ओर से इस पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।