लंदन ओलंपिक में बदतर प्रदर्शन के बाद भारतीय हॉकी में छाई तूफान से पहले की शांति टूटने जा रही है। हॉकी टीम की फिटनेस को पटरी पर लाने वाले आस्ट्रेलियाई फिजिकल ट्रेनर डेविड जॉन ने विद्रोह कर दिया है।
उन्होंने हॉकी इंडिया और साई को साफ कर दिया है कि उन्हें पुराने स्वरूप में नया अनुबंध स्वीकार नहीं है। इस रवैये के चलते वह नए विकल्प तलाशने को मजबूर हैं। वहीं हॉकी इंडिया ने डेविड की धमकी खारिज करते हुए कह दिया है कि उन्हें ठीक वेतन दिया जा रहा है। उनके नहीं आने पर नया फीजियो रखा जाएगा।
यह नया बखेड़ा उस वक्त खड़ा हुआ है जब भारतीय टीम पटियाला में प्रतिष्ठित चैंपियंस ट्राफी की तैयारियों में जुटी है। जहां कोच माइकल नॉब्स के साथ डेविड अब तक नहीं पहुंचे हैं। ओलंपिक से पहले हॉकी टीम की सफलता में डेविड का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने टीम के फिटनेस स्तर को काफी ऊंचा उठाया।
खास बात यह है कि डेविड का साढ़े पांच हजार आस्ट्रेलियाई डॉलर पर अनुबंध नॉब्स ने कराया। सूत्रों की मानें तो डेविड ने हॉकी इंडिया को कहा है कि वह कई मौकों पर अपना वेतन बढ़ाने को कह चुके हैं। लेकिन अच्छा काम करने के बावजूद उन्हें टीम के पिछले फीजियो के मुकाबले काफी वेतन मिल रहा है। यहां तक एशियाई चैंपियंस ट्राफी व ओलंपिक क्वालीफाइंग के खिताब के बावजूद उनकी उपयोगिता नजरअंदाज की गई, जिसके चलते अब उन्हें नए विकल्प तलाशने होंगे।
डेविड के इस कदम के बाद नॉब्स के आगमन पर भी संदेह खड़ा हो गया है। हालांकि हॉकी इंडिया के सेक्रेटरी जनरल नरिंदर बत्रा का कहना है कि नॉब्स का वीजा तैयार हो रहा है। वह जल्द कैंप से जुड़ेंगे। लेकिन बत्रा डेविड के रवैये से खफा हैं। वह साफ करते हैं कि उन्हें ठीक वेतन दिया जा रहा है।
हालांकि यह साई का आधिकार क्षेत्र है कि वह उनका वेतन बढ़ाते हैं या नहीं। लेकिन उनकी नजरों में डेविड का वेतन बढ़ाए जाने की जरूरत नहीं है। उन्हें उनकी टीम से नहीं जुड़ने की धमकी अस्वीकार है। अगर वह नहीं आते हैं तो उनके स्थान पर अन्य फीजियो को अनुबंधित कर लेंगे।