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हॉकी विश्व कप 2018: इन तीन खिलाड़ियों के बूते क्वार्टर फाइनल तक पहुंच पाया भारत

Tue, 11 Dec 2018 05:03 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, भुवनेश्वर

सार

भारतीय अग्रिम पंक्ति जीत में निभा रही अहम भूमिका 
स्ट्राइकर ललित, मनदीप और दिलप्रीत की त्रिमूर्ति बोली, यही
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विस्तार
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ललित उपाध्याय, मनदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह और सिमरनजीत सिंह सरीखे स्ट्राइकरों ने भारतीय टीम को हॉकी विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। टीम ने अपने तीन मैचों में जो 12 गोल किए हैं उनमें ललित और सिमरनजीत ने तीन-तीन, मनदीप और आकाशदीप ने एक-एक किया।

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भारत ने सिर्फ तीन गोल खाए हैं। ललित, मनदीप और दिलप्रीत ने ‘अमर उजाला’ ने कहा कि अग्रिम पंक्ति में सभी की फिनिशिंग बेहतर रही है। इसलिए वे ज्यादा गोल कर पा रहे हैं। यही टीम की कामयाबी का कारण भी है।

अगले इम्तिहान के लिए तैयार हैं हम: ललित

ललित उपाध्याय - फोटो : self
बनारस के 25 वर्षीय ऑलराउंडर ललित शानदार प्रदर्शन कर सुर्खियों में हैं। उन्होंने कहा,‘हम अगले इम्तिहान के लिए तैयार हैं। सामने चाहे कोई भी टीम हो। उन्होंने कहा कि मैं चाहे मैं स्ट्राइकर के रूप में खेलूं या मिडफील्डर के रूप में अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश करता हूं। टीम के लिए जो भी जिम्मेदारी मिलती है मैं उस पर खरा उतरने की कोशिश करता हूं। मैं जो भी गोल करता हूं वह मेरा नहीं टीम का गोल होता है। मैं स्ट्रक्चर पर काबिज रह कर डी में मौकों को भुनाकर गोल करने पर ध्यान लगाता हूं। मैं हरेन्द्र सर की इस बात पर यकीन करता हूं कि डॉज औैर ड्रिब्लिंग के कौशल को सही वक्त पर इस्तेमाल करने से ही यह कारगर रहती है। यह मैदान पर एक बनाम एक की स्थिति में कारगर रहती है। हमारे पास अपना डॉज और ड्रिब्लिंग का कौशल है तो यूरोपीय टीम अपनी थ्री डी स्किल यानी गेंद को जमीन पर लेने की बजाय अपनी स्टिक पर लेकर आगे ले जाना आता है।’

गोल स्कोरिंग 70-80 बेहतर हुई: मनदीप

तेईस वर्षीय अनुभवी स्ट्राइकर मनदीप सिंह कहते हैं, ‘राष्ट्रमंडल व एशियाई खेलों और एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में अग्रिम पंक्ति में स्ट्राइकर बहुत मौके चूक रहे थे। अग्रिम पंक्ति यहां बेहतर खेल रही है। हमारी गोल स्कोरिंग 70 से 80 फीसदी बेहतर हुई है। अग्रिम पंक्ति मैदानी गोल करने के साथ साथ पेनाल्टी कॉर्नर बनाने पर फोकस कर रही है। हम इसमें बहुत हद तक कामयाब भी हुए हैं। फॉरवर्ड की पूरी कोशिश डी में गेंद मिलने पर पहले मैदानी गोल करने की रहती है। यदि जगह न मिले तो कम से कम पेनाल्टी कॉर्नर दिलाने पर पूरी ताकत झोंक देते हैं। टीम की फिटनेस भी बहुत बढ़िया है। हमारा क्वार्टर फाइनल में सामना नीदरलैंड से होने की उम्मीद है। हमें जो चार दिन मिले हैं उनमें लीग मैचों की गलतियां सुधारकर मैदान में उतरेंगे।
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फोकस मौकों को भुना कर गोल करने पर: दिलप्रीत

भारत के सबसे कम उम्र के 19 वर्षीय स्ट्राइकर दिलप्रीत कहते हैं, ‘मुझे विश्व कप में अपने पहले गोल का इंतजार है। मुझे गोल के मौके तो मिले पर मैं उन्हें गोल में नहीं बदल पाया। हम सभी का फोकस ‘डी’ में बेहतर फिनिशिंग के साथ गोल करने पर है। मेरी कोशिश डी में जो मौका मिले उसे गोल में बदलने के साथ पेनाल्टी कॉर्नर दिलाने की रहती है। हम अगली चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सामने चाहे जो भी हो।
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