हॉकी के 'जादूगर' ध्यानचंद को देश के शीर्ष नागरिक सम्मान भारत रत्न दिए जाने की मुहिम ने फिर से जोर पकड़ लिया है।
बेटे अशोक कुमार की मानें तो उन्होंने कभी भी पिता से अपना हक मांगने की बात कही तो उन्हें यही जवाब मिला। लेकिन अब यह लड़ाई खुद हॉकी के महान खिलाड़ी रहे अशोक कुमार लड़ने की ठानी है।
‘मेरा काम मैदान पर था, मैंने उसे पूरा कर दिया, उनका काम फैसले लेने का है यह उन्हीं को करने दो।’ यह शब्द किसी और के नहीं बल्कि खुद दद्दा ध्यानचंद के हैं।
अशोक कुमार के इस अभियान में उनका साथ कोई और नहीं बल्कि हॉकी की दुनिया से अलग महान खब्बू स्पिनर बिशन सिंह बेदी दे रहे हैं।
अपने खेलों के ध्रुव रहे इन दोनों खिलाड़ियों ने गुरुवार को खेल मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर दद्दा को उनका हक भारत रत्न दिलाने की आवाज उठाई।
अशोक की मानें तो उनके मन में हमेशा एक कशिश सी उठती है कि उनके पिता को वह हक नहीं मिला जो उन्हें मिलना चाहिए था। वह सिर्फ यही चाहते हैं कि खेलों में अगर भारत रत्न मिले तो इसकी शुरूआत द्ददा से हो।
उन्होंने अपनी इसी अभिव्यक्ति को खेल मंत्री से व्यक्त किया है। क्रिकेटरों ने यह अभियान सचिन तेंदुलकर के लिए छेड़ रखा है।
लेकिन बिशन बेदी ने अलग मिसाल पेश करते हुए खेल मंत्री से यही कहा जो कद क्रिकेट में ब्रैडमैन फुटबाल में पेले का है वही दर्जा हॉकी में ध्यानचंद को प्राप्त है। ऐसे में इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के वह सबसे पहले हकदार हैं।
खेल मंत्री ने दिया आश्वासन
अशोक कुमार के मुताबिक खेल मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि मंत्रालय की ओर से दद्दा के नाम का प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जाएगा।
हालांकि अजय माकन के कार्यकाल में द्ददा और तेनजिंग नोर्गे के नामों की प्रस्तावना मंत्रालय की ओर से की गई थी।