फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदुस्तानी रंग में रंगे हैमिल्टन खास बनाएंगे रेस

Wed, 24 Oct 2012 11:08 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
किसी दूसरे विदेशी ड्राइवर की अपेक्षा लुइस हैमिल्टन का भारत से जुड़ाव कहीं ज्यादा रहा है। भले ही इस देश का ट्रैफिक उन्हें हैरान करता हो। लेकिन मैकलारेन के इस ड्राइवर को भारत अपना दूसरा घर लगने लगा है। यह खुलासा कोई और नहीं बल्कि खुद हैमिल्टन करते हैं।
विज्ञापन


यही कारण है कि बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर वह अपने पिछले कड़वे अनुभव भुलाते हुए इस बार कुछ कर गुजरना चाहते हैं। हालांकि हैमिल्टन ने स्वीकार कर लिया है कि वह वर्ल्ड चैंपियन की दौड़ से बाहर हो चुके हैं। लेकिन उनकी दिली इच्छा है कि वह वोडाफोन-मैकलारेन-मर्सिडीज को कांस्ट्रक्टर चैंपियनशिप (टीम चैंपियनशिप) दिलाकर अनूठी विदाई दें।

हैमिल्टन का यह मैकलारेन के साथ अंतिम सत्र है। अगले सत्र में वह माइकल शूमाकर की जगह मर्सिडीज की ओर से फर्राटा भरेंगे। इस वक्त मैकलारेन 284 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है जबकि रेड बुल 367 अंकों के साथ बढ़त पर है। हैमिल्टन का मानना है कि बाकी बची चार रेसों में वह और जेंसन बटन अपने अच्छे प्रदर्शन से यह दूरी पाट सकते हैं।
विज्ञापन


हैमिल्टन कहते हैं यही कारण है कि विश्व विजेता की दौड़ में नहीं होने के बावजूद इंडियन ग्रां प्री उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ड्राइवर की निगाह सिर्फ रेस जीतने पर होती है। यही उनका लक्ष्य है। हालांकि बीआईसी का ट्रैक कुछ धीमा है, जो बेहद चुनौतीपूर्ण रहेगा।

भारतीय संस्कृति उनकी मेहमाननवाजी हैमिल्टन को खूब भाई है। यही कारण है कि वह आठवीं बार इस देश में हैं और आगे भी इस सिलसिले को जारी रखेंगे। हैमिल्टन अगले सत्र से शूमाकर की जगह ले रहे हैं। लेकिन इसे वह अपनी बढ़ाई नहीं बल्कि सौभाग्य मानते हैं।

उनका कहना है कि बतौर ड्राइवर शूमाकर ने जो प्राप्त किया है, दूसरे ने नहीं किया है। उनकी सीट प्राप्त करना उनके लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं है। हैमिल्टन के लिए बरसात भी चिंता का कोई सबब नहीं है। उनका कहना है कि उनकी जिंदगी की अब तक की सर्वश्रेष्ठ रेस मोनाको में बरसात में हुई थी। उन्हें गीले ट्रैक पर ड्राइविंग में कोई दिक्कत नहीं है।

कार्तिकेयन को अच्छी कार की जरूरत
हैमिल्टन का मानना है कि नारायण कार्तिकेयन एक अच्छे ड्राइवर हैं। लेकिन उन्हें एक अच्छी कार की जरूरत है। अगर उनके पास अच्छी कार होती तो उनके परिणाम भी अच्छे होते। वह यह भी मानते हैं कि किसी देश की टीम का ड्राइवर उसी देश से होना अच्छा रहता है। जबकि इस सत्र में अपनी विफलता के पीछे वह टायरों को जिम्मेदार मान रहे हैं। उन्हें अपनी कार से कोई दिक्कत नहीं है।

‘बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में रेसिंग के लिए फिर से उतरना एक बेहद खास अनुभव है। मौजूदा हालात में मैं न तो पोडियम के बारे में सोच सकता हूं और न ही अंकों के बारे में। इसलिए मेरा लक्ष्य केवल इतना है कि पिछले वर्ष से बेहतर प्रदर्शन करूं और दर्शक इसका लुत्फ उठा सकें।’ - कार्तिकेयन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें