किस तरह खिताब जीतने में सफल रहे प्रज्ञानंद
- प्रज्ञानंद ने आखिरी दिन की शुरुआत 15 अंक के साथ तीसरे स्थान से की।
- उन्होंने सबसे अहम मौके पर बेहतरीन खेल दिखाया और क्लासिकल बाजी में जीत हासिल करके पूरे तीन अंक बटोरे।
- इस तरह वे 18 अंक पर पहुंचे और एलीट शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों में से एक अपने नाम की।
- प्रज्ञानंद के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने नार्वे शतरंज के सात बार के चैंपियन और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल बाजी में दो बार हराया।
खिताब जीतने के बाद प्रज्ञानंद ने कहा, मां ने मुझसे कहा था कि यह नया महीना है, तुम अच्छा खेलोगे। मैंने जवाब दिया, ठीक है, यह उन बातों में से एक है जो मां अक्सर कहती हैं। इसके बाद मैंने लगातार चार गेम जीत लिए। मुझे लगता है कि मां को कुछ पता था।