यह किसी भी कीमत पर आसान काम नहीं था। कॉमनवेल्थ गेम्स की तरह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने में डिस्कस थ्रोअर विकास गौड़ा की राह में सबसे बड़ा रोड़ा लंदन ओलंपिक में रजत जीतने वाले एशियाई कीर्तिमानधारी ईरान एहसान हदादी थे। अगर विकास अपना सर्वश्रेष्ठ करते तब भी हदादी को चुनौती देना उनके लिए आसान नहीं था।
आखिर उनके नाम 69.32 मीटर का एशियाई रिकार्ड है, लेकिन जिस तरह से विकास ने मंगलवार को मेन स्टेडियम में हदादी के समक्ष आत्मसमर्पण किया वह निराश करने वाला था। वह अपने कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्णिम प्रदर्शन को भी नहीं दोहरा पाए। बावजूद इसके वह भाग्यशाली रहे जो रजत पदक उनकी झोली में आकर गिरा।
अंतिम तीन थ्रो रहीं फाउल
विकास की अंतिम तीन थ्रो फाउल रहीं जिसके चलते हदादी लगातार दूसरे एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे। विकास ने अपनी दूसरी थ्रो 62.58 की फेंकी और हदादी की दूसरी थ्रो 65.11 रही। यही दोनों थ्रो स्वर्ण और रजत पदक निर्धारित करने वाली रहीं। दरअसल गौड़ा पर हदादी की इस थ्रो ने इस कदर दबाव बनाया कि वह आगे की थ्रो में पूरी तरह बिखर गए। उन्होंने अपनी अंतिम तीनों थ्रो फाउल कीं।
कॉमनवेल्थ गेम्स में विकास ने 63.13 मीटर के साथ स्वर्ण जीता था लेकिन उन्हें वहां कोई चुनौती देने वाला नहीं था। यहां उन्हें हदादी को हराने के लिए अपने सौ प्रतिशत से भी बढ़कर देना था। हालांकि हदादी का यह प्रदर्शन सीजन का सर्वश्रेष्ठ नहीं था। उन्होंने इस सत्र में 65 मीटर से कुछ अधिक की ही डिस्कस फेंकी है। इस वजह से यह माना जा रहा था कि विकास उन्हें कड़ी चुनौती दे सकते हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका। हालांकि पिछले एशियाई खेलों में विकास ने कांस्य जीता था लेकिन यहां उन्हें रजत मिला।
टिंटू लूका ने किया फाइनल के लिए क्वालीफाई
एथलेटिक्स में पदक की बड़ी उम्मीद टिंटू लूका ने महिलाओं की 800 मीटर रेस के फाइनल में जगह बना ली है। लूका ने हीट में शीर्ष पर रहकर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। उनके साथ ही सुषमा देवी भी इस र्ध्धा के फाइनल के लिए क्वालीफाई करने में सफल रही। वहीं पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़ में सिद्धांत थिंगलैया छठे स्थान पर रहे। महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ में गत चैंपियन अश्विनी अकुंजी भी फाइनल में क्वालीफाई करने में सफल रहीं। पुरुषों की 800 मीटर रेस में एस जोसफ ने भी फाइनल में जगह बना ली।