इंडियन ग्रां प्री (आईजीपी) में इस बार फार्मूला-वन कारें गत वर्ष की तुलना में और तेज रफ्तार से दौड़ती नजर आ सकती हैं। इसके लिए विभिन्न टीमों ने अपनी कारों में कई महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव किए हैं। दरअसल फॉर्मूला-वन रेस हिम्मत, दूरदर्शिता, रोमांच के साथ ही तकनीकी शोध और विकास का सम्मिलित नतीजा है।
प्रत्येक कैलेंडर सीजन में टीमें अपनी-अपनी कारों में कुछ न कुछ तकनीकी बदलाव कर उनकी क्षमता बढ़ाने के प्रयास करती हैं। एफ-वन टीम के मुख्यालय में तकनीकी टीम सालभर लगातार कारों की क्षमता और प्रदर्शन बढ़ाने के लिए शोध और विकास कार्य करती रहती हैं, जिसका नतीजा प्रत्येक रेस में कारों के बेहतर प्रदर्शन के रूप में देखने को मिलता है।
फॉर्मूला-वन रेस कैलेंडर 2012 के सीजन को देखें तो सितंबर से अब तक कुछ एफ-वन टीमों द्वारा आठ तकनीकी बदलाव किए गए हैं, जिससे कारों की क्षमता में सुधार देखने को मिला है। इस सत्र में रेडबुल रेनॉल्ट टीम द्वारा अपनी कार आरबी-8 में सर्वाधिक बदलाव किए गए हैं, लेकिन रेडबुल, फरारी, लोटस, मर्सडीज टीमों द्वारा किया गया सुधार आईजीपी के दौरान देखने को मिलेगा।