देश की एकमात्र फॉर्मूला-1 टीम फोर्स इंडिया में फिलहाल किसी भी भारतीय ड्राइवर को निकट भविष्य में जगह नहीं मिलने जा रही है। फोर्स इंडिया के डिप्टी टीम प्रिंसिपल राबर्ट फर्नले ने साफ कर दिया है कि उन्हें अपनी टीम जीतने वाली बनानी है। यहां देशभक्ति से काम नहीं लिया जा सकता।
फोर्स इंडिया की स्थापना के बाद से ही विजय माल्या व सुब्रत राय सहारा की इस टीम ने किसी भी भारतीय ड्राइवर को जगह नहीं दी है। माल्या के पुराने साथी फर्नले ने अमर उजाला से कहा कि फिलहाल उन्हें पूरे भारत में ऐसा कोई ड्राइवर नजर नहीं आता है, जिसे फोर्स इंडिया में जगह दी जा सकती हो। वह किसी को भी उठाकर टीम में शामिल नहीं कर सकते हैं। हां, भारतीय ड्राइवरों को तैयार करने के लिए उनकी टीम जरूर अभियान चला रही है। कई युवा ड्राइवरों को तराशा जा रहा है। लेकिन उन्हें पेशेवर बनने में समय लगेगा। यही कारण है कि निकट भविष्य में भी टीम में किसी भारतीय ड्राइवर को शामिल किए जाने की उम्मीद नहीं है।
हालांकि मैकलारेन के ड्राइवर लुइस हैमिल्टन ने अभी कुछ दिन पूर्व ही कहा था कि अगर भारतीय ड्राइवर नारायण कार्तिकेयन फोर्स इंडिया के लिए ड्राइव करें तो यह उनके लिए बड़ा कदम होगा। वह एक अच्छे ड्राइवर हैं लेकिन उनके पास एचआरटी की कमजोर कार है। जबकि फोर्स इंडिया के पास अच्छी कारे हैं।
वहीं फर्नले का कहना है कि उनकी टीम बड़ी फिनिशर नहीं बन पाई है। वह अभी उन टीमों में शामिल है जिनमें फिनिश करने की क्षमता है। 2013 में नियमों में परिवर्तन के बाद टीम के प्रदर्शन में सुधार आएगा। लेकिन उनकी टीम पिछले सत्र के 48 के मुकाबले अब तक 89 अंक जुटाकर सफलता की बड़ी कहानी लिख चुकी है। फर्नले यह भी कहते हैं कि उनके ड्राइवर निको हल्केनबर्ग के किसी दूसरी टीम के पास जाने की योजना नहीं है। अगले सत्र में वह फोर्स इंडिया के साथ ही रहेंगे। वैसे ड्राइवरों पर अपनी रणनीति का खुलासा वह दिसंबर में करेंगे।