भारतीय फुटबॉल के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से 'जोर से भारत 2034' पहल की शुरुआत की गई। इस कार्यक्रम का लक्ष्य जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान, कोचों का विकास, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और खिलाड़ियों के लिए पारदर्शी एवं सुरक्षित व्यवस्था तैयार करना है।
भारतीय फुटबॉल को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की गई है। न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम, जहां 2026 फीफा विश्व कप का फाइनल खेला गया था, वहीं से 'जोर से भारत 2034' कार्यक्रम लॉन्च किया गया।
विज्ञापन
जमीनी स्तर से तैयार होंगे नए खिलाड़ी
इस पहल का मुख्य उद्देश्य देशभर में फुटबॉल प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और आधुनिक खेल विज्ञान की सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके तहत सार्वजनिक ट्रायल आयोजित किए जाएंगे, जिनमें चयनित खिलाड़ियों को आगे के विकास कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। साथ ही ग्रासरूट स्तर के कोचों को प्रशिक्षित करने, विकास शिविर आयोजित करने और खिलाड़ियों की फिटनेस, पोषण तथा चोट से बचाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पारदर्शी और सुरक्षित व्यवस्था पर जोर
आयोजकों के अनुसार, खिलाड़ियों और उनके परिवारों के लिए एक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह प्रणाली तैयार की जाएगी। खिलाड़ियों की प्रगति का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा, जबकि कार्यक्रम में भागीदारी, खर्च और विकास संबंधी रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाएंगी। इसके अलावा अनुभवी कोच, पूर्व खिलाड़ी, खेल वैज्ञानिक और प्रशासकों को शामिल कर एक स्वतंत्र फुटबॉल एडवाइजरी काउंसिल बनाई जाएगी, जो चयन प्रक्रिया और तकनीकी मानकों की निगरानी करेगी।
विज्ञापन
15 अगस्त से शुरू होगी आधिकारिक वेबसाइट
इस पहल की आधिकारिक वेबसाइट 15 अगस्त 2026 को लॉन्च की जाएगी। इसी प्लेटफॉर्म पर ट्रायल की तारीखें, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य जरूरी जानकारी साझा की जाएगी। पहल के नेतृत्वकर्ताओं ने कहा कि भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ उन्हें सही कोचिंग, नियमित प्रतियोगिताओं और दीर्घकालिक विकास का अवसर देने की है। उनका मानना है कि 2034 फीफा विश्व कप को लक्ष्य बनाकर भारतीय फुटबॉल के विकास की रफ्तार को नई दिशा दी जा सकती है।