विश्व कप में शनिवार को दूसरा मैच उरुग्वे और कोस्टारिका के बीच खेला गया। उरुग्वे ने अपने दबदबे के अनुरूप मैच में अधिकतर समय कोस्टारिका को बचाव की मुद्रा में रखा। इसके बावजूद मध्यांतर के बाद अचानक कोस्टारिका के खेल में ज़बरदस्त चढ़ाव देखने को मिला। उसने उरुग्वे को 3-1 से मात देकर तहलका मचा दिया।
उरुग्वे ने मध्यांतर से पहले खेल के 24वें मिनट में मिली पेनल्टी किक पर एडींसन कावानी के गोल की मदद से 1-0 की बढ़त बनाई। दक्षिण अमरीकी महाद्वीप की ये दोनों टीमें विश्व कप के इतिहास में पहली बार आमने-सामने आईं। मध्यांतर के बाद 21 वर्षीय कोस्टारिका के जोएल कैम्पबेल ने पेनल्टी एरिया मिले पास पर लैफ्ट फ़ुट से बेहद दमदार शॉट लगाकर बॉल को गोल में बदलकर पूरी उरुग्वे टीम को हक्का-बक्का कर दिया।
अभी उरुग्वे इस सदमे से उभरा भी नहीं था कि पेनल्टी एरिया के बाहर से मिली फ़्री किक पर कोस्टारिका के ऑस्कर डुआर्टे ने हैडर से गोल कर टीम को 2-1 से आगे कर दिया। यह सब कुछ मध्यांतर के बाद केवल तीन मिनट के अंदर हुआ।
दूसरा गोल खेल के 54वें और तीसरा गोल 57वें मिनट में हुआ। डुआर्टे का तो यह पहला अंतराष्ट्रीय गोल था। अचानक बदले समां से उरुग्वे के समर्थकों की आंखो में आंसू आ गए, तो कइयों के चेहरे पर खामोशी छा गई।
ऐसा होता भी क्यों नही, आखिरकार दुनिया में सातवीं रैंकिंग और 1930 में पहली बार हुए विश्व कप और 1950 के विश्व कप की चैंपियन टीम अपने से कहीं पीछे 28वीं रैंकिंग की टीम से पिछड़ रही थी। इसके बाद कोस्टारिका ने छह मिनट शेष रहते हुए तीसरा गोल भी दाग दिया।
यहां मध्य रेखा के पास दाएं छोर से डुआर्टे ने बॉल को संभाला और एक बेहतरीन पास मार्कोस यूरेना को दिया, जिन्होंने गोलकीपर को छकाते हुए गोल कर दिया। इसके साथ ही एक अत्यंत नाटकीय मैच में कोस्टारिका ने कोलंबिया को 3-1 से मात दे दी।
कौन जानता था कि दो बार की चैंपियन और साल 2010 में चौथे स्थान पर रहने वाली कोलंबिया की ऐसी गत बनेगी। ऐसे परिणाम के बाद वाकई यह ग्रुप ऑफ़ डेथ साबित हुआ, जिसका शिकार कोलंबिया बनी क्योंकि इस ग्रुप की दूसरी टीमें इंग्लैंड और इटली हैं।