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शादियों में गाना गाने वाला कैसे बन गया फुटबॉल का सर्वेसर्वा?

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थोड़ा अजीब लेकिन यह सच है, जिसने कभी फुटबॉल नहीं खेला। वह फुटबॉल का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन गया। स्विटजरलैंड में एक साधारण से परिवार में जन्म लेने वाले स्टेप ब्लाटर ऊंचे ख्वाब के साथ पैदा जरुर थे लेकिन उनकी शुरुआत साधारण रही।
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ब्लाटर को पहली नौकरी मिली, शादी में गाना गाने की। हालांकि इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। घड़ी बनाने की फैक्ट्री में काम करने से लेकर स्विटजरलैंड आइस हॉकी फेडरेशन तक ब्लाटर ने 1975 तक हर जगह अपना करियर आजमाया। लेकिन मंजिल फुटबॉल पर मिली।

1975 में ब्लाटर ने फीफा तकनीकी डायरेक्टर और 1981 में जनरल सैक्रेटी का पद संभाला। 8 जून 1998 को 51वीं फीफा कांग्रेस में फीफा में पहली बार अध्यक्ष बने। फुटबॉल की दुनिया को अमेरिका से बाहर निकालकर एशिया और अफ्रीका में पहुंचाने का श्रेय ब्लाटर को ही जाता है।
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फुटबॉल के मैदान के बाहर के सबसे बड़े बाजीगर स्टेप ब्लाटर ने तीन शादियां की जरुर की। लेकिन तीनों बेटियों से उनकी सिर्फ एक ही बेटी है। ब्लाटर स्वीडिश सेना में कर्नल पद तक भी पहुंचे।

सबको पता था फीफा में कुछ तो है लेकिन...

फीफा से जुड़ने के बाद स्टेप ब्लाटर ने भ्रष्टचार शुरू किया। स्‍थानीय अखबार के स्पोटर्स एडिटर हेंस पीटर ने उस वक्त ब्लाटर के बारे में कहा था कि "वह बहुत महत्वकांक्षी है।" उस वक्त फीफा में धांधली और भ्रष्टाचार की बात सामने आई लेकिन किसी को इस बात इल्म तक नहीं था कि इसके पीछे कोई और नहीं फुटबॉल को पूरे विश्व में फैलाने वाला ब्लाटर है।

फुटबॉल की ब्रांडिंग और प्रचार का काम ब्लाटर ने बखूबी किया। फीफा के मुनाफे को शिखर तक पहुंचाया लेकिन इसके साथ अपनी जेब का भी पूरा ध्यान रखा। अरबों की अकूत संपदा हड़पने वाले ब्लाटर ने मात्र एक साल के भीतर ही 1.7 म‌िलियन डॉलर की काली कमाई कर डाली।

ब्लाटर की गद्दी संभालने से फीफा वर्ल्ड कप 1998 तक मेजबानी जहां अमेरिका और यूरोपीय देशों में ही हुआ करती थी। उनके कार्यकाल संभालने के बाद माहौल बदल गया। अगला वर्ल्ड कप 2002 दक्षिण कोरिया और जापान की संयुक्त मेजबानी में हुआ। 2010 में दक्षिण अफ्रीका और 2014 में ब्राजील ने फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी की।
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2006 वर्ल्ड कप में हुआ था अजीब किस्सा

बात 2006 वर्ल्ड कप की है। जर्मनी टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा था। पुर्तगाल और नीदरलैंड के एक मैच के दूसरे हॉफ में एक वाकया हुआ। मैच के रेफरी वेलेंटिन ने इस मैच में दोनो खिलाड़ियों को 16 येलो कार्ड और 4 रेड कार्ड दिखाए। मैच पूरा होने के बाद स्टेप ब्लाटर ने रेफरी पर तंज कसते हुए कहा कि रेफरी अपने खराब प्रदर्शन पर खुद को येलो कार्ड देना चाहिए।

हालांकि फिर ब्लाटर ने इन बातों से पल्‍ला झाड़ दिया। बाद में माफी की बात भी सामने आई। लेकिन सच्चाई यह है कि ब्लाटर ने कभी माफी मांगी ही नहीं और उस रेफरी को दोबारा मैच में रखा भी नहीं गया।

आज ब्लाटर अपने काले कारनामों के चलते फीफा से बाहर है। लगातार पांचवीं बार अध्यक्ष बनने के बाद ब्लाटर को चार दिन बाद ही अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। उनके अलावा और भी फीफा के और भी कई ‌दिग्गज है जो बेनकाब होने बाकी है। देखना यह है कि इस बाजीगर के बाद अब किसकी बारी?
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