विश्व के सबसे पसंदीदा खेल फुटबॉल पर भ्रष्टाचार स्कैंडल के बाद उठे विरोध के सुरों के बीच भी फीफा अध्यक्ष सैप ब्लाटर लगातार पांचवीं बार कुर्सी पर काबिज हो गए।
ज्यूरिख में हुए 209 सदस्यीय फीफा की कांग्रेस में 79 साल के ब्लाटर ने जॉर्डन के प्रिंस अली बिन अल हुसैन को पहले चरण में 73 के मुकाबले 133 वोटों से पराजित कर दिया। फीफा को भ्रष्टाचार मुक्त करने का वादा लेकर मैदान में उतरे प्रिंस अली बिन अस हुसैन की अपील सदस्यों पर ज्यादा असर नहीं डाल सकी जबकि वैश्विक फुटबॉल संस्था को भ्रष्टाचार के बड़े आरोपों से जकड़ी नजर आ रही है।
एक तरफ अमेरिकी और स्विस एजेंसियां रिश्वत के आरोपों की जांच कर रही हैं। जब मतदान हो रहा था तब फीफा के कुछ अधिकारी हिरासत में थे।
प्रिंस अली ने 73 वोट हासिल कर चुनाव को दूसरे चरण के लिए बढ़ा जरूर दिया था लेकिन इससे पहले कि दूसरा चरण होता प्रिंस अली ने हार स्वीकार कर ली।
चुनाव से पहले कांग्रेस में अपने संबोधन के दौरान ब्लाटर ने खेल को शर्मिंदगी और अपमान के दौर से गुजरने के लिए दूसरों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि उनके या फीफा के लिए हरेक पर नजर रखना नामुमकिन है और फुटबॉल में जो खराब हुआ उसके लिए उन्हें कसूरवार नहीं ठहराया जा सकता।
अगले 4 साल के लिए फिर से फीफा के बॉस बने ब्लाटर ने यह जीत यूफा अध्यक्ष माइकल प्लाटिनी और अन्य के इस्तीफे की मांग के बावजूद दर्ज की है। यहां तक कि प्रायोजक भी भ्रष्टाचार स्कैंडल से खासी नाराजगी जता चुके हैं। वीसा जैसे बड़े प्रायोजक ने तो अपना अनुबंध वापस लेने की धमकी भी दी है।
कैसे होता है चुनाव: फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा के 209 सदस्य हैं। फीफा की कांग्रेस के दौरान प्रतिद्वंद्वियों को अपनी बात रखने का मौका मिलता है। वोटिंग के दौरान किसी उम्मीदवार को दो-तिहाई यानी 140 वोटों की जरूरत होती है। अगर पहले चरण में फैसला नहीं होता तो दूसरा चरण होता जिसमें स्पष्ट बहुमत हासिल करने वाला जीत दर्ज कर लेता है।
कौन है प्रिंस अली: जॉर्डन के प्रिंस अली बिन अल हुसैन पिछले चार सालों से एशिया से फीफा के उपाध्यक्ष रहे हैं। वह किंग हुसैन के बेटे हैं।