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FIFA World Cup: न्यूजीलैंड के लिए खेलने उतरा यह भारतीय मूल का खिलाड़ी, हासिल की खास उपलब्धि

Tue, 16 Jun 2026 05:28 PM IST
शिवम गर्ग स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

न्यूजीलैंड के मिडफील्डर सरप्रीत सिंह फीफा वर्ल्ड कप में शुरुआत करने वाले पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने ईरान के खिलाफ 2-2 ड्रॉ मैच में शानदार प्रदर्शन किया।
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सरप्रीत सिंह - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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न्यूजीलैंड के अटैकिंग मिडफील्डर सरप्रीत सिंह ने इतिहास रच दिया है। वह किसी भी टीम के लिए फीफा वर्ल्ड कप मैच में शुरुआत करने वाले पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी बन गए हैं। मंगलवार को लॉस एंजिलिस में ईरान के खिलाफ खेले गए मुकाबले में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की, जो 2-2 से ड्रॉ रहा।
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पंजाबी मूल के परिवार से ताल्लुक रखते हैं सरप्रीत
ऑकलैंड में पंजाबी परिवार में जन्मे 27 वर्षीय सरप्रीत सिंह को कोच डैरेन बाजले ने शुरुआती XI में जगह दी। उन्होंने लगभग पूरा मैच खेला और 90वें मिनट में उन्हें बदला गया। उनके माता-पिता पंजाबी मूल के हैं और भारतीय संस्कृति से उनका गहरा जुड़ाव है। सरप्रीत ने न्यूजीलैंड फुटबॉल टीम को 2010 के बाद पहली बार विश्वकप में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। सरप्रीत जर्मन क्लब एफसी बेयर्न म्यूनिक के लिए भी खेल चुके हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि वे दिल से भारतीय हैं और पंजाबी संस्कृति को अपने जीवन में बनाए हुए हैं। क्रिकेट में वह विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर के बड़े प्रशंसक हैं।

मैदान पर दिखाया आक्रामक खेल, तीन शॉट लगाए
नंबर-10 जर्सी पहनकर खेलते हुए सरप्रीत ने मिडफील्ड में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने ईरान के खिलाफ तीन शॉट लगाए, जिसमें 61वें मिनट का एक प्रयास भी शामिल था, जिसे गोलकीपर ने रोक दिया। न्यूजीलैंड की 4-2-3-1 फॉर्मेशन में वह मिडफील्ड के केंद्र में सक्रिय रहे।

भारत में भी खेल चुके हैं सरप्रीत
सरप्रीत सिंह ने साल 2018 में मुंबई में हुए इंटरकॉन्टिनेंटल कप में भारत के खिलाफ भी खेला था। उस दौरान वह न्यूजीलैंड की U-23 टीम का हिस्सा थे और उन्होंने केन्या के खिलाफ गोल किया था, जबकि भारत के खिलाफ दो असिस्ट भी दिए थे।

बायर्न म्यूनिख तक पहुंचा करियर
2019 में उन्होंने इतिहास रचते हुए जर्मनी के बायर्न म्यूनिख क्लब के लिए बुंडेसलीगा में खेलने वाले पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। इसके बाद उन्होंने पुर्तगाल और सर्बिया में भी क्लब फुटबॉल खेला।

अन्य भारतीय मूल खिलाड़ियों की भी मौजूदगी
इस वर्ल्ड कप में अन्य भारतीय मूल के खिलाड़ियों की भी मौजूदगी रही है। ऑस्ट्रेलिया के निशान वेलुपिल्ले और कतर के तहसीन मोहम्मद जमीशद ने भी डेब्यू किया है। वहीं डीआर कांगो के सैमुअल मूटूसामी भी स्क्वॉड का हिस्सा हैं।

 
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फुटबॉल में भारतीय मूल खिलाड़ियों की बढ़ती पहचान
फीफा नियमों के अनुसार, खिलाड़ी किसी देश के लिए खेलने के योग्य होते हैं यदि उनके माता-पिता या दादा-दादी का जन्म उस देश में हुआ हो और उनके पास उस देश का पासपोर्ट हो। सरप्रीत सिंह की यह उपलब्धि भारतीय मूल के खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में एक बड़ी पहचान मानी जा रही है।
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