भारत और कुवैत की टीमें लंबे समय बाद एक-दूसरे के खिलाफ खेल रही थीं। दोनों के बीच अंतिम मुकाबला लगभग 13 साल पहले नवंबर, 2010 में हुआ था, जिसमें कुवैत को भारत पर 9-1 के अंतर से भारी विजय मिली थी। दोनों ही टीमें टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बना चुकी हैं, लेकिन दोनों के ही बीच ग्रुप ए में शीर्ष स्थान हासिल करने की होड़ थी। स्कोर बराबर रहने के बावजूद ग्रुप स्टेज में ज्यादा गोल करने की वजह से कुवैत की टीम पहले स्थान पर रही। वहीं, टीम इंडिया दूसरे स्थान पर रही। इससे पहले भारत ने पाकिस्तान को 4-0 और नेपाल को 2-0 से हराया था।
कम करनी होगी गोल के मामले में छेत्री पर निर्भरता
भारतीय टीम ने पाकिस्तान पर 4-0 से जीत जरूर हासिल की, लेकिन नेपाल के खिलाफ 2-0 से जीत में पहले एक घंटे के दौरान उसे कोई गोल नसीब नहीं हुआ था। गोल के मामले में टीम की 38 वर्षीय स्ट्राइकर सुनील छेत्री पर निर्भरता काफी ज्यादा है। उन्होंने टीम के कुल सात में से अब तक पांच गोल किए हैं। टीम के मिडफील्डर साहल अब्दुल समद का कहना है कि उनके समेत टीम के दूसरे खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा लक्ष्य पर निशाना साधना होगा, जिससे छेत्री पर पड़ रहे भार को कम किया जा सके। कुवैत के खिलाफ मुकाबले में भी छेत्री काफी एक्टिव दिखे। हालांकि, सेमीफाइनल में छेत्री के अलावा दूसरों को भी गोल करने की जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी।