अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू एंड कश्मीर में भले ही फोन और इंटरनेट की सेवाएं बंद कर दी गई हों, लेकिन टीम इस दौरान श्रीनगर में ही ट्रेनिंग करती रही। खास बात यह थी कि विशेष अनुमति के तहत टीम को एक फोन दिया गया था। चट्टू के मुताबिक टीम में विदेशी खिलाड़ी भी हैं जिसके चलते यह फोन कभी तड़के तीन बजे तो कभी देर रात घनघना उठता था। यही फोन था जो खिलाड़ियों के सगे -संबंधियों को उनकी चिंताओं से दूर कराता था। हालांकि चट्टू मानते हैं कि फोन न होना अच्छा ही था खिलाड़ी इंटरनेट और फोन से दूर सिर्फ फुटबॉल ही खेलते रहे जिससे टीम की तैयारियां काफी अच्छी हुई हैं।
दुकानदार नहीं लेते पैसे : चट्टू टीम के विदेशी कोच डेविड राबर्टसन की तारीफ करते नहीं थकते हैं। उनका बेटा भी टीम के लिए खेलता है। राबर्टसन और टीम के खिलाड़ी कश्मीर में हीरो बन गए हैं। कोई भी खिलाड़ी किसी भी दुकान पर सामान खरीदने जाता है तो उनसे पैसे नहीं लिए जाते हैं। बैंक में जाने पर कहा जाता है कि आप क्यों आए हैं वह खुद ही बैंक में आ जाते। बाहर खिलाड़ियों के साथ सेल्फी लेने की होड़ लग जाती है।