पेले का जन्म ब्राजील के छोटे शहर मिनास गेराइस में 23 अक्तूबर 1940 को हुआ था। उनके पिता क्लब स्तर पर फुटबॉल खेला करते थे। पेले की मां हाउसवाइफ थीं। रोचक बात यह है कि पेले का नाम एडिसन था। इस नाम के पीछे की कहानी भी काफी खास है।
ब्राजील के महानतम फुटबॉलर पेले का निधन साओ पाउलो में हो गया। वह 82 वर्ष के थे। पेले को फुटबॉल का जादूगर कहा जाता था। उनका करिश्मा कुछ ऐसा था कि जिसकी बराबरी आज तक कोई भी फुटबॉल खिलाड़ी नहीं कर पाया। पांच बार विश्व कप जीतने वाली ब्राजील की टीम तीन बार तो पेले के रहने ही खिताब जीती थी। उनकी मौजूदगी में 1958, 1962 और 1970 में ब्राजील चैंपियन बना था।
विज्ञापन
दुनिया को अपने पैरों का जादू दिखाने वाले पेले का असली नाम यह नहीं था। ना ही उनका यह निकनेम था। पेले का जन्म ब्राजील के छोटे शहर मिनास गेराइस में 23 अक्तूबर 1940 को हुआ था। उनके पिता क्लब स्तर पर फुटबॉल खेला करते थे। पेले की मां हाउसवाइफ थीं। रोचक बात यह है कि पेले का नाम एडिसन था। इस नाम के पीछे की कहानी भी काफी खास है।
अपने नाम के पीछे की कहानी पेले ने अपने संस्मरण 'व्हाई सॉकर मैटर्स' में बताई थी। उन्होंने लिखा था, ''मेरे जन्म से पहले हमारे शहर में बिजली नहीं थी। जिस दिन मेरा जन्म हुआ था उसी दिन शहर में बिजली का बल्ब पहुंचा था। बल्ब की रोशनी को देखकर मेरे माता-पिता काफी खुश थे। उन्होंने इस बल्ब के अविष्कारक थामस एल्वा एडसन के नाम पर मेरा नाम एडसन रख दिया, लेकिन गलती से वह स्पेलिंग उनके नाम की नहीं रख पाए।''
विज्ञापन
एडसन बन गया डिको
पेले का पूरा नाम एडसन एरेंटस डो नासिमेंटो था। ब्राजील में अमूमन हर इंसान के एक-दो निकनेम जरूर होते हैं, जिससे उनके घरवाले उन्हें बुलाते हैं। एडसन का निकनेम 'डिको' रखा गया। उनके पिता फुटबॉल में अपना करियर नहीं बना पाए। उन्होंने 'डिको' को फुटबॉलर बनाने का सपना देखा। पेले का परिवार मिनास गेराइस से साओ पाउलो के बाउरू शहर में आ गया। बचपन में ट्रेनिंग के दौरान ही पेले ने सबको अपना दीवाना बना लिया। उनकी चर्चा चारों तरफ होने लगी थी। पेले कभी फटे-पुराने कपड़ों से गेंद बनाकर खेलते थे तो कभी मालगाड़ी से समान चुराकर गेंद खरीदते थे।
डिको को नया नाम मिला- गैसोलिना
पेले कम उम्र में ही अपने साथियों को छकाने लगे। उन्हें कोई मैदान में पकड़ नहीं पाता था। इस कारण उनका नाम 'गैसोलिना' बन गया। पेले को यह नाम कुछ हद तक पसंद भी आया था। ऐसे में सवाल यही है कि पेले का नाम, पेले कैसे पड़ गया। उस दौर में ब्राजील में पुर्तगाली भाषा का चलन था और उसमें पेले शब्द का कोई मतलब नहीं निकलता था,लेकिन बावजूद इसके जब 15 साल की उम्र में ब्राजील के मशहूर क्लब सैटोंस से पेले जुड़े तो उनका नाम पेले पड़ चुका था।
कैसे नाम पड़ा पेले?
पेले नाम रखने जाने के सच के बारे में पेले ने 'व्हाई सॉकर मैटर्स' में बताया है, कोई ठीक-ठीक नहीं बता पाता है कि पेले नाम कहां से आया, लेकिन मेरे मामा जॉर्ज ने जो बताया है, उस पर विश्वास किया जा सकता है। पेले के मामा जॉर्ज, उनके साथ ही रहते थे और कई साल तक उनकी नौकरी के चलते ही पेले के परिवार का भरन-पोषण होता रहा।
जॉर्ज के मुताबिक़, बाउरू की स्थानीय फुटबॉल क्लब टीम के एक गोलकीपर का नाम था बिले, ये वही क्लब था जिसमें पेले के पिता भी खेलते थे। बिले अपनी शानदार गोलकीपिंग के चलते बेहद लोकप्रिय थे। 'दूसरी ओर बचपन में डिको को कई मुकाबलों में गोलकीपर की भूमिका भी निभानी होती थी, जब वे शानदार बचाव करते थे, तो लोग कहने लगे थे कि ये दूसरा बिले है, या देखो ये खुद को बिले मानने लगा है। देखते-देखते ये बिले कब पेले में बदल गया है, इसका किसी को अंदाजा भी नहीं हुआ। हालांकि ये वो दौर था जब डिको, साथियों से भिड़ जाया करते थे कि किसने मुझे पेले बुलाया, क्यों बुलाया, मेरा नाम तो ठीक से लो।'