इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) को देश की नंबर एक फुटबॉल लीग बनाने को पूरी तरह कमर कस ली गई है। आईएसएल टीमों की संख्या बढ़ाने के लिए इस माह के अंत तक बोली आमंत्रित करने जा रही है, लेकिन देश की सबसे महंगी फुटबॉल लीग में आई लीग से कितने क्लब शामिल होंगे इसने देश के सबसे पुराने क्लबों में से एक मोहन बागान की नींद उड़ा दी है।
बागान को आईएसएल में शामिल होने के लिए कोलकाता के एक अन्य क्लब एटीके के साथ आने का प्रस्ताव दिया गया है जो उसे स्वीकार नहीं है। जहां आईएसएल में शामिल होने के लिए आई लीग क्लबों में होड़ मची है वहीं वर्तमान में आई लीग टॉपर चेन्नई एफसी ने साफ कर दिया है कि उन्हें इस लीग में शामिल नहीं होना है।
ईस्ट बंगाल को आईएसएल से जोडने पर बनी है सहमति
आईएसएल में इस वक्त 10 टीमें खेल रही हैं, जबकि एआईएफएफ सूत्रों के मुताबिक आई लीग से एक या दो टीमें लेने का प्रस्ताव रखा गया है। जिसके लिए इस माह बोली आमंत्रित की जा रही है। जिस टीम को बोली के जरिए आईएसएल में शामिल करने पर सहमति बनी है वह ईस्ट बंगाल है।
बड़ा और पुराना क्लब होने के नाते मोहन बागान को दूसरी टीम के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन यह भी कहा गया कि दो कोलकाता की बड़ी टीमें आईएसएल में शामिल की गईं तो पहले से लीग में खेल रही एटीके का कोई वजूहद नहीं रह जाएगा। जिसके चलते बागान को एटीके के साथ मिलकर आईएसएल में आने को कहा गया है। अगले सत्र से आईएसएल को देश की नंबर एक लीग और आई लीग को लीग-1 का दर्जा दिया जा रहा है।
चेन्नई एफसी का आईएसएल में आने से इंकार
आई लीग खिताब जीतने के कगार पर खड़ी चेन्नई एफसी के मालिक रोहित रमेश ने साफ कर दिया है कि उनकी टीम आईएसएल में खेलने की बजाय आई लीग-1 में खेलना पसंद करेगी। चेन्नई एफसी ने बुधवार को स्विटजरलैंड के 125 साल पुराने क्लब एफसी बासेल के साथ अपनी 26 प्रतिशत हिस्सेदारी का करार किया। किसी भारतीय क्लब में विदेशी क्लब की ओर से हिस्सेदारी का करार करने का यह पहला मामला है।