मोहन बागान सुपर जायंट ने कोलकाता डर्बी में ईस्ट बंगाल को 1-0 से हराकर आईएफए शील्ड का खिताब अपने नाम कर लिया। गुरुवार को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में खेले गए रोमांचक फाइनल में बोस्नियाई मिडफील्डर समीर जेल्जकोविच ने 45वें मिनट में निर्णायक गोल किया। इस जीत के साथ मोहन बागान ने 22वीं बार आईएफए शील्ड का खिताब अपने नाम किया। साथ ही टीम ने करीब पांच दशक बाद एक ही सत्र में कलकत्ता फुटबॉल लीग (सीएफएल) और आईएफए शील्ड दोनों खिताब जीतने की उपलब्धि हासिल की है। इससे पहले मोहन बागान ने 1976 में यह उपलब्धि हासिल की थी, तब दिवंगत पीके बनर्जी टीम के कोच थे।
समीर जेल्जकोविच
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हाफ टाइम से ठीक पहले जेल्जकोविच ने किया गोल
मुकाबले का पहला हाफ काफी कड़ा रहा और दोनों टीमों को गोल के लिए संघर्ष करना पड़ा। हालांकि हाफ टाइम से ठीक पहले मोहन बागान ने बढ़त बना ली। 45वें मिनट में साहल अब्दुल समद ने जेल्जकोविच की ओर चिप पास खेला। जेल्जकोविच ने गेंद को छाती से नियंत्रित किया और इसके बाद शांत दिमाग से गेंद को ईस्ट बंगाल के गोलकीपर के पार पहुंचाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद दूसरे हाफ में ईस्ट बंगाल ने बराबरी के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन मोहन बागान की रक्षापंक्ति को भेदने में नाकाम रहा। मुकाबले के अंतिम मिनटों में भी ईस्ट बंगाल ने दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन उसे बराबरी का गोल नहीं मिला।
डूरंड कप फाइनल की हार का लिया बदला
मोहन बागान के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि इसी सत्र के डूरंड कप फाइनल में ईस्ट बंगाल ने उसे 4-1 से करारी शिकस्त दी थी। उस मुकाबले के बाद आईएफए शील्ड के फाइनल में जीत ने मोहन बागान को उस हार का बदला लेने का मौका दिया। इस बार मोहन बागान का प्रदर्शन भले ही बेहद आक्रामक नहीं रहा, लेकिन टीम ने पूरे मुकाबले में बेहतर नियंत्रण और रक्षात्मक अनुशासन दिखाया।
मोहन बागान सुपर जायंट
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ईस्ट बंगाल का आक्रामक खेल फाइनल में नहीं चला
ईस्ट बंगाल ने फाइनल तक के सफर में शानदार प्रदर्शन किया था। सेमीफाइनल में टीम ने नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी को 7-2 से हराया था। उस मुकाबले में डेविड लाल्हलांसांगा ने हैट्रिक लगाई थी। हालांकि फाइनल में ईस्ट बंगाल की वही आक्रामक लय नजर नहीं आई। टीम के मुख्य कोच एंटोनियो हाबास के लिए यह नतीजा निराशाजनक रहा होगा, खासकर तब जब इंडियन सुपर लीग का नया सत्र कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है।
पेनल्टी शूटआउट के बाद फाइनल में पहुंचा था मोहन बागान
मोहन बागान को फाइनल तक पहुंचने के लिए काफी मुश्किल रास्ते से गुजरना पड़ा था। सेमीफाइनल में पंजाब एफसी के खिलाफ मुकाबला निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय के 30 मिनट के बाद भी गोलरहित रहा था। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट में मोहन बागान ने 4-3 से जीत दर्ज की। गोलकीपर विशाल कैथ ने इस जीत में अहम भूमिका निभाई थी।
लगातार दूसरी बार आईएफए शील्ड फाइनल में भिड़ीं दोनों टीमें
ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के बीच यह आईएफए शील्ड फाइनल में लगातार दूसरी भिड़ंत थी। पिछले साल भी दोनों टीमें खिताबी मुकाबले में आमने-सामने थीं, जहां मोहन बागान ने पेनल्टी शूटआउट में जीत हासिल की थी। 2026 का यह मुकाबला दोनों टीमों के बीच इस साल की पांचवीं भिड़ंत थी। लगातार बड़े मुकाबलों में आमना-सामना होने से इस ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता की तीव्रता और बढ़ गई है। आईएफए शील्ड की यह जीत मोहन बागान के लिए नए आईएसएल सत्र से पहले बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला परिणाम है। वहीं ईस्ट बंगाल की नजर अब आगामी आईएसएल सत्र पर होगी, जहां टीम अपने खिताब के बचाव के लिए मैदान में उतरेगी।