अर्जेंटीना की टीम लंबे समय से अपने एक खिलाड़ी पर निर्भर रही, जो कोई और नहीं बल्कि कप्तान लियोनेल मेसी हैं। अर्जेंटीना ने फीफा विश्व कप 2018 के अपने अभियान की शुरुआत बेहद खराब अंदाज में की और विश्व कप में पहली बार हिस्सा लेने वाली आइसलैंड के खिलाफ मैच 1-1 से ड्रॉ खेला। इसके बाद क्रोएशिया से उसे 0-3 की करारी शिकस्त झेलना पड़ी, जिसमें साफ दिखा कि मेसी का जादू रोकने के लिए क्रोएशिया ने अपनी रक्षापंक्ति बेहद मजबूत कर रखी थी।
नाइजीरिया के खिलाफ अर्जेंटीना के लिए करो या मरो का मैच था। अगर टीम हारती या मैच ड्रॉ खेलती तो पहले ही राउंड में उसका सफर समाप्त हो जाता। मैच शुरू होने के चंद मिनटों के बाद ही लियोनेल मेसी का जादू दिखा और उन्होंने 14वें मिनट में करिश्माई गोल किया। यह फीफा विश्व कप 2018 का 100वां गोल भी रहा।
बार्सिलोना के सुपरस्टार के लिए यह गोल बेहद राहतभरा रहा क्योंकि उन्होंने 662 मिनट के बाद फीफा विश्व कप में गोल किया। आखिरी बार उन्होंने नाइजीरिया के खिलाफ ही 2014 विश्व कप में गोल किया था। हालांकि, नाइजीरिया ने भी मोसेस के गोल की बदौलत स्कोर 1-1 से बराबर कर लिया।
फिर अंतिम पलों में मार्कोस रोजो अर्जेंटीना की जीत के हीरो बने, जिन्होंने 86वें मिनट में शानदार मैदानी गोल करके टीम की जीत पक्की कर दी। इसी के साथ अर्जेंटीना ने नॉकआउट चरण में प्रवेश किया और अब शनिवार को उसका मुकाबला ग्रुप-सी की विजेता फ्रांस से होगा।
मैच के बाद रोजो ने खुलासा किया कि कप्तान मेसी ने ब्रेक टाइम के दौरान टीम से क्या कहा था, जिसकी वजह से सभी में जोश भर गया और नाइजीरिया को वह मात देने में कामयाब रहे। रोजो ने कहा, 'हाफटाइम में मेसी ने हम सभी से कहा कि जब भी मौका मिले तो हमारी जिम्मेदारी गोल करने की है। हमे शूट करना है चाहे हम किसी भी पोजीशन पर खेल रहे हो। इसलिए जब गेंद मेरी तरफ आई तो मैंने उस पर किक जमाई क्योंकि मुझे विश्वास था कि गेंद जाली के अंदर जाएगी।'