2016 में यहीं लिया था संन्यास का फैसला
26 जून 2016 को कोपा अमेरिका फाइनल में चिली के खिलाफ पेनाल्टी शूटआउट में चूकने के बाद मेसी ने कहा था कि अब उनका अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म हो गया है। उस घोषणा ने पूरी फुटबॉल दुनिया को हैरान कर दिया था। हालांकि अर्जेंटीना के प्रशंसकों और साथियों के आग्रह पर उन्होंने कुछ ही समय बाद वापसी कर ली।
वापसी के बाद मेसी ने वह सब हासिल किया, जिसकी उनके करियर में कमी मानी जाती थी। उन्होंने 2021 और 2024 में कोपा अमेरिका, 2022 में फाइनलिसिमा और उसी साल फीफा विश्व कप जीतकर खुद को महानतम खिलाड़ियों की सूची में और मजबूत कर लिया।
10 साल बाद अधूरी रह गई फेयरीटेल विदाई
19 जुलाई 2026 को मेसी अपने करियर का तीसरा विश्व कप फाइनल खेलने के लिए फिर मेटलाइफ स्टेडियम पहुंचे। उम्मीद थी कि यह मैदान इस बार उनकी सुनहरी विदाई का गवाह बनेगा, लेकिन स्पेन की अनुशासित और आक्रामक फुटबॉल ने ऐसा नहीं होने दिया। पूरे मैच में स्पेन ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और मेसी को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। अर्जेंटीना लगातार दबाव में रही और अतिरिक्त समय में फेर्रान टोरेस के गोल ने मुकाबले का फैसला कर दिया।
रिकॉर्ड भी नहीं बना सके मेसी
मेसी ने टूर्नामेंट में आठ गोल किए और विश्व कप में अपने कुल गोलों की संख्या 21 तक पहुंचाई, लेकिन वह फ्रांस के किलियन एमबाप्पे (22 गोल) को पीछे नहीं छोड़ सके। गोल्डन बूट और सर्वाधिक विश्व कप गोल करने का रिकॉर्ड भी उनके हाथ नहीं लगा। व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिहाज से भी यह फाइनल उनके लिए निराशाजनक रहा। मेसी ने फीफा विश्वकप 2026 में आठ गोल किए, जबकि एमबाप्पे ने 10 गोल के साथ गोल्डन बूट जीता। गोल्डन बॉल भी स्पेन के कप्तान रोड्री को दिया गया।
एक मैदान, दो दर्दनाक यादें
मेटलाइफ स्टेडियम अब मेसी के करियर से हमेशा के लिए जुड़ गया है। 2016 में यहीं उन्होंने संन्यास का एलान किया था और 2026 में इसी मैदान पर विश्व कप जीतकर विदाई लेने का सपना टूट गया। फर्क सिर्फ इतना रहा कि पहली बार उन्होंने हार के बाद खेल छोड़ने का फैसला किया था, जबकि दूसरी बार हार ने उनके आखिरी विश्व कप को भावुक अंत दे दिया। फुटबॉल इतिहास में शायद ही किसी महान खिलाड़ी के करियर का ऐसा पूर्ण चक्र किसी एक मैदान पर देखने को मिला हो।