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एएफसी एशियन कप फुटबॉल: ऐसी है भारतीय फुटबॉल टीम, इन 23 पर रहेगा सारा दारोमदार

Thu, 03 Jan 2019 02:37 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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सुनील छेत्री की अगुवाई में भारत की टीम संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में होने वाली एएफसी एशियन कप फुटबॉल चैंपियनशिप में अपने अभियान का आगाज अबू धाबी में 6 जनवरी को थाईलैंड के खिलाफ मैच से करेगी। भारत की टीम एएफसी एशियन कप में ग्रुप 'ए’ में बहरीन, थाईलैंड और मेजबान यूएई के साथ रखा गया है। एएफसी कप में भारत का दारोमदार इन 23 पर रहेगा।

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गोलकीपर

गुरप्रीत सिंह संधू:

उम्र (26 वर्ष)। 2017 में नार्वे के क्लब स्ताबेक से हीरो इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) का रुख करने के बाद के गुरप्रीत ने क्लब स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। वह राष्ट्रीय फुटबॉल कोच स्टीफेन कांस्टेनटाइन की पहली पसंद हैं। वह निर्विवाद रूप से भारत के नंबर एक गोलरक्षक हैं। हाल ही में उन्होंने कई मौकों पर भारत के लिए सराहनीय प्रदर्शन किया है। भारत का यह पतला दुबला और लंबा गोलरक्षक प्रतिद्वंद्वी के हमलों को भांपने में माहिर है। यही उन्हें बतौर गोलरक्षक देश का बेहतरीन गोलरक्षक बनाता है। वह नार्वे जाने से पहले ईस्ट बंगाल के लिए खेले। संधू भारत के लिए 29 मैच खेल चुके हैं।

अमरिंदर सिंह:

उम्र 25 बरस। अमरिंदर ने अपने फुटबॉल करियर का आगाज एक स्ट्राइकर के तौर पर किया लेकिन कोच ने उनकी गोलकीपिंग क्षमताओं को पहचाना। पंजाब में जन्मे अमरिंदर राष्ट्रीय टीम में गुरप्रीत के बाद दूसरे सबसे अच्छे गोलकीपर हैं। हीरो आईएसएल में मुंबई सिटी एफसी के लिए खेलने वाले अमरिंदर इससे पहले पुणे एफसीए एटीके और बेंगलुरु एफसी के लिए खेल चुके हैं। वह एएफसी कप सेमीफाइनल में भी खेल चुके हैं। अमरिंदर अपनी गजब की फुर्ती के कारण  उनका नाम देश के श्रेष्ठ गोलरक्षकों में लिया जाता है।
 
विशाल कैथ:

उम्र 22 बरस। एफसी पुणे सिटी के लिए खेलते हुए विशाल कैथ ने खुद की पहचान देश के प्रतिभाशाली गोलरक्षक के रूप में बनाई। उनके रिफलेक्सिज अच्छे हैं। वह हवा में अचूक गोता लगाकर वह गेंद को लपक कर खुद अपने कब्जे में लेने में माहिर है। वह खुद को गुरप्रीत के उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित करने में कामयाब रहे हैं। कैथ 2018 के सैफ चैंपियनशिप के लिए भारत के पसंदीदा गोलकीपर थे। वह सभी चार मैचो में खेले थे और दो में उन्होंने कोई गोल नहीं खाया।

डिफेंडर्स

प्रीतम कोटल:

राइट बैक (25 बरस) : टाटा फुटबॉल अकादमी (टीएफए) में अपना फुटबॉल कौशल निखारने वाले प्रीतम कोटल ने बीते तीन साल में खुद को भारत के अग्रणी राइट बैक के रूप में स्थापित किया है। बंगाल के प्रीतम कोटल इससे पहले मोहन बागान सहित देश के कई नामी क्लबों के लिए खेल चुके हैं। कोटल डिफेंस में किले के बाएं छोर पर मजबूती से उसकी किलेबंदी करना जानते हैं। वह बतौर फुलबैक हैं आगे जाकर हमला बोलना भी खूब जानते हैं।

सार्थक गोलुई:

राइट बैक, उम्र 21 बरस। राइट बैक सार्थक बिना रुके और बिना थके मैदान पर हर वक्त हर जगह नजर आएंगे। वह किले के मजबूत प्रहरी तो हैं हमला बोलने में भी बराबर मदद करते हैं। आईएसएल के बीते दो सीजन से वह पुणे सिटी के लिए खेल रहे हैं और क्लब कोचों की पहली पसंद रहे हैं।  

संदेश झींगन: 

राइट बैक,उम्र 25 बरस।  चंडीगढ़ में जन्मे संदेश झींगन हाल के वर्षों में देश तथा क्लब के लिए लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में से एक हैं। अब तक आईएसएल में वह केरल ब्लास्टर्स के लिए ही खेले हैं। झींगन शारीरिक रूप से मजबूत लंबे कद के डिफेंडर हैं और बेहद आक्रामक और बेखौफ खेल में यकीन करते हैं। वह राइट बैक में भी खेल सकते हैं और इसी कारण वह भारतीय टीम के लिए बेहद उपयोगी हैं। 

अनस इदाथोदिका:

सेंटर बैक, उम्र 31 बरस। केरल में फुटबॉल के गढ़ माने जाने वाले मालापुरम के वाशिंदे अनस को 2007 में पहली बार मुंबई एफसी ने मौका दिया था। 2015 में वह हीरो आईएसएल टीम दिल्ली डायनमोज के साथ जुड़े। साल 2017 में वह जमशेदपुर एफसी के लिए चुने गए। 2018-19 सीजन में वह केरल ब्लास्टर्स के लिए खेले। अनस ने भारत के लिए 15 मैच खेले हैं। संदेश झींगन के साथ अच्छा तालमेल होने के कारण कोच स्टीफेन कांस्टेनटाइन ने उन्हें सेंटर बैक के तौर पर टीम में शामिल किया है। 

सलाम रंजन सिंह

फुलबैक। उम्र : 23 बरस। मणिपुर में जन्मे सलाम रंजन सिंह पुणे एफसी अकादमी की देन हैं। आई लीग के 2013-14 सीजन में उन्होंने पदार्पण किया। तीन साल वह पुणे के लिए खेले और इसमें एक साल बेंगलुरु एफ सी के पास लोन पर रहे। फिलहाल वह ईस्ट बंगाल के लिए खेल रहे हैं और राष्ट्रीय टीम में शामिल आई लीग के एकमात्र खिलाड़ी हैं। 

शुभाशीष बोस

लेफ्ट फुल बैक, उम्र 23 बरस। शुभाशीष बोस पुणे एफसी यूथ अकादमी की देनहैं। युवा बोस मोहन बागान और बेंगलुरू एफसी के लिए खेल चुके है और फिलहाल मुंबई सिटी एफसी के लिए खेल रहे हैं।  कोलकाता में जन्मे बोस जरूरत पडने पर सेंटर बैक भी खेल सकते हैं लेकिन मूलत: वह लेफ्ट बैक हैं।

नारायण दास

लेफ्ट बैक। उम्र 25 साल। बंगाल के वाशिंदे नारायण दास टाटा फुटबॉल अकादमी की देन हैं। बाएं पैर के डिफेंडर ने अपने पेशेवर करियर के दौरान पेलियान एरोज और ईस्ट बंगाल जैसे प्रमुख क्लबों को सेवाएं देने के बाद इस साल दिल्ली का रुख किया है। साल 2013 में वह पहली बार भारत के लिए खेले और अब वह कोच स्टीफन कांस्टेनटाइन की पहली पसंद बन चुके हैं।

मध्यक्रम

उदांत सिंह

राइट विंग हाफ। उम्र :22 साल। टाटा फुटबॉल अकादमी में बतौर फुटबॉलर अपना जलवा दिखाकर उदांत ने अपनी एक खास पहचान बनाई है। वह अपनी रफ्तार और कलात्मक खेल के लिए जाने जाते हैं। वह स्पीडी विंगर हैं और काफी कलात्मक हैं। मणिपुर में जन्मे उदांता साल 2014 में बेंगलुरु एफसी में शामिल हुए और तब से लेकर आज तक वह इस क्लब के अहम सदस्य बने हुए हैं। उदांता को तेजी से आगे बढ़ कर गोल करना भी खूब आता है। 

राउलिन बोर्जेज:

रक्षात्मक मिडफील्डर, उम्र : 26 बरस। देश के शीर्ष रक्षात्मक मिडफील्डरों में से एक हैं बोर्जेज। गोवा के बाशिंदे बोर्जेज न 2016 में नॉर्थ ईस्ट युनाइटेड एफसी का रुख किया और इस क्लब के अहम सदस्य बन गए। वह भारतीय टीम के लिए भी अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं। भारत को एएफसी एशियन कप के लिए क्वॉलिफाई कराने में उनका रोल खासा अहम रहा। बोर्जेज ने भारत की मकाउ पर जीत में एक गोल भी किया था।

अनिरुद्ध थापा:

आक्रामक मिडफील्डर। उम्र 20 बरस। देहरादून में जन्मे अनिरुद्ध थापा 2016 में चैन्नैयन एफसी के लिए खेलते हुए सुर्खियों में  आए। वह अपनी गजब की सूझबूझ और बेहतरीन पासिंग के कारण भारत के तुरुप के इक्के हैं। वह भारत के लिए अटैकिंग मिडफील्डर के तौर पर भी खेल सकते हैं। भारत के लिए वह अब तक 13 मैच खेले हैं। मध्यपंक्ति में उनकी और प्रणय हल्धर की जोड़ी लाजवाब नहीं है।

विनीत राय:

सेंट्रल मिडफील्डर। उम्र 21 बरस। असम में जन्मे विनीत देश के सबसे बेहतरीन मिडफील्डरों में से एक हैं। आईएसएल में वह पहली बार 2016 में केरल के लिए खेले और फिर दिल्ली का रुख किया। तकनीकी रूप से मजबूत विनीत मध्यपंक्ति के तुरुप के इक्के हैं। वह अब भारतीय फुटबॉल टीम का वह अहम हिस्सा हैं।  हाल ही बांग्लादेश मे 2018 सैफ  चैंपियनशिप में विनीत अपने बेहतरीन खेल के कारण सुर्खियों में रहे। 

मिडफिल्डर्स

हालीचरण नरजारे:

आक्रामक मिडफील्डर। उम्र : 24 बरस। भारत के बेहतरीन विंगर नरजारे दोनों छोर से हमले बोलना खूब जानते हैं। साल 2015 में वह गोवा से नार्थईस्ट युनाइटेड एफसी गए और फिर तीन सीजन तक इस क्लब के लिए खेले। नरजारे पिछले कई बरस से भारत के फुटबॉल कोच स्टीफन कांस्टेनटाइन के तुरुप के इक्के हैं। साल 2015 में वह पहली बार भारत के लिए खेले और 23 मैचों में उन्होंने अब तक एक गोल किया है।

आशिक कुरुनियन: 

उम्र: 22 बरस। कुरुनियन भारतीय टीम के उन चुनिंदा खिलाड़ी में से एक हैं जो यूरोप में विलारियल क्लब की सी टीम के साथ प्रशिक्षण पा चुके हैं। इसके बाद से उन्होंने खुद को भारतीय राष्ट्रीय टीम के प्रमुख चेहरे के रूप में स्थापित किया है। 2018 में वह चीनी ताइपे के खिलाफ इंटरकांटिनेंटल कप में भारत के लिए पहली बार खेले। 22 साल के खिलाड़ी को पुणे के कोच प्रद्युम्न रेड्डी ने बहुत मौका दिया है और इस कारण वह बीते कुछ समय में काफी अच्छे खिलाड़ी के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

जर्मनप्रीत सिंह:

उम्र: 22 बरस। जमर्नप्रीत सिंह टाटा फुटबॉल अकादमी की देन हैं। बहुत जल्दी ही उन्होंने खुद को भारतीय फुटबॉल टीम के स्ट्राइकर के रूप में स्थापित कर लिया। वह खुद करने के साथ गोल के अभियान बनाने के साथ बेहतरीन पास देना भी खूब जानते हैं। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी टीम के खिलाडियों के बीच दरार तलाशना खूब आता है। 

जैकीचंद सिंह:

उम्र: 26 बरस। जैकीचंद आई लीग में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली रॉयल वाहिंगदोह की टीम का अहम हिस्सा थे। मणिपुर में जन्मे जैकी इसके बाद कई क्लबों में खेले। अब वह एफसी गोवा में है। सर्जियो लोबेरा के मार्गदर्शन में यह खिलाड़ी अब अपने खेल में  लगातार सुधार कर रहा है। जैकी अब स्टीफन कांस्टेनटाइन की टीम का 2015 से अहम हिस्सा हैं। वह यूएई में अपनी शानदार फॉर्म जारी रखना चाहेंगे।

प्रणय हल्दर:  
उम्र: 25 बरस। प्रणय हल्दर ने हाल के बरस में भारतीय फुटबॉल टीम की मध्यपंक्ति के तारणहार बन चुके हैं। अपने सूझबूझ वाले खेल से वह फुटबॉल के जानकारों को अपना मुरीद बना चुके हैं। अनिरुद्ध थापा और हल्दर भारत के हमलों और रक्षण की अहम कड़ी बन चुक हैं। भारत के लिए उन्होंने 11 मैच खेले हैं जिसमें से एक में गोल किया है।  
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अग्रिम पंक्ति

सुनील छेत्री: 

उम्र: 34 बरस। भारतीय फुटबॉल टीम के आक्रमण की धुरी हैं सुनील छेत्री। बतौर कप्तान बेहतरीन खेल के साथ अपने साथियों से बेहतरीन प्रदर्शन कराना भी खूब जानते हैं। छेत्री ने भारत के लिए सबसे ज्यादा गोल किए हैं। वह किसी भी पल विपक्षी टीम को छकाने का माद्दा रखते हैं। छेत्री का खेल बढ़ती उम्र के साथ और जवां होता जा रहा है। वह देश के सभी दिग्गज क्लबों के लिए खेल चुके है। साथ ही वह स्पोर्टिंग लिस्बन बी और मेजर लीग सॉकर (एमएलएस) के लिए खेल चुके हैं।

जेजे लालपेखुलवा: 

उम्र 27 बरस। जेजे ललपेखलुआ अपने मूव को शानदार तरीके से अंजाम तक पहुंचाने में माहिर हैं। बॉक्स के भीतर गोल करने में उनका कोई सानी नहीं है। पुणे एफसी के साथ शुरुआत करने वाले मिजोरम में पैदा हुआ यह स्ट्राइकर अपनी प्रतिबद्धता और जुनून के लिए जाना जाता है।  

सुमित पासी: 

उम्र 24 बरस। चंडीगढ़ फुटबॉल अकादमी में शुरू में जलवा दिखाने के बाद सुमित ने राष्ट्रीय टीम के लिए पहला मैच 2016 में एशियन कप क्वॉलिफायर मैचों में खेला था। वह मेहनती स्ट्राइकर हैं। मैच के मिजाज के मुताबिक पासी को गियर बदल कर खेलना खूब आता है। . 

बलवंत सिंह:

होशियारपुर  में जन्में बलवंत अपने पैरों की कलाकारी के कारण किसी भी प्रतिद्वंद्वी टीम के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। जेसीटी से आगाज करने के बाद बलवंत देश के कई बड़े क्लबों के लिए खेल चुके है।  इनमें सालगांवकर, चर्चिल ब्रदर्स और मोहन बागान शामिल हैं। भारत के लिए पदार्पण करने के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन जब मौका मिला उन्होंने उसे दोनों हाथों से भुनाया। अपने पहले मैच में मॉरिशस के खिलाफ गोल किए। इसके बाद से उनके खेल में सुधार आता गया और अब वह कांस्टेनटाइन की टीम का अहम हिस्सा हैं।
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