फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के कोच जर्मनी के निकोलाई एडम होते तो वर्ल्ड कप में देश के लिए पहला गोल कर इतिहास पुरुष बनने वाले जिक्सन सिंह शायद टीम में नहीं होते। यह सच्चाई है कि जिक्सन को एडम ने दो साल पहले फुटबालरों की स्काउटिंग के दौरान अपनी कोर टीम में जगह नहीं दी थी।
यह पुर्तगाली कोच लुई नार्टन डि माटोस ही थे, जिन्होंने सात माह पूर्व मणिपुर के इस फुटबॉलर को अपनी योजनाओं में शामिल किया। जिक्सन का माटोस की नजरों में चढ़ने का सबसे बड़ा कारण उनकी लंबाई थी। एडम ने उन्हें अत्यधिक लंबाई के चलते चयनित नहीं किया और माटोस लंबे फुटबॉलर चाहते थे।
माटोस ने जब इंटरनेशनल फुटबॉलर अभिषेक यादव से कहा कि उन्हें लंबा मिडफील्डर चाहिए, तब वो जैक्सन को उनके पास लाए। माटोस ने फौरन उनकी प्रतिभा को पहचान और कोर टीम में जगह दी। जैक्सन का कहना है कि उस दौरान उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मिनर्वा औ्रर आई लीग में उनकी टीम चेन्नई सिटी एफसी में मिडफील्ड की बारीकियां सीखींए जो उनके चयन में काम आईं।
वह साफ करते हैं कि उनका नाम जैक्सन नहीं बल्कि जिक्सन है। गोल करने पर उन्हें खुशी तो है, लेकिन हार ने इसी खुशी को खत्म कर दिया है। इससे वह निराश हैं।