इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के 11 क्लबों ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को चेतावनी दी है कि अगर इस शीर्ष-स्तरीय घरेलू प्रतियोगिता के भविष्य को लेकर चल रहे गतिरोध का जल्द ही हल नहीं किया गया तो क्लबों के पूरी तरह से बंद होने का वास्तविक संकट बना रहेगा। आईएसएल का गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है जिस कारण चिंता बनी हुई है।
एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे को लिखे एक पत्र में क्लबों ने कहा कि राष्ट्रीय महासंघ और आईएसएल के आयोजक एफएसडीएल के बीच मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) का नवीनीकरण नहीं होने के कारण उत्पन्न हुए संकट ने भारत में पेशेवर फुटबॉल को पंगु बना दिया है। क्लबों ने पत्र में कहा, पिछले 11 वर्षों में निरंतर निवेश और लगातार प्रयास के माध्यम से क्लबों ने युवा विकास प्रणालियां, प्रशिक्षण अवसंरचना, सामुदायिक पहुंच कार्यक्रम और पेशेवर टीमें बनाई हैं। इन टीमों ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की फुटबॉल साख को बढ़ाया है। यह प्रगति अब पतन की ओर बढ़ने लगी है। मौजूदा परिस्थितियों ने तत्काल और गंभीर परिणाम उत्पन्न किए हैं। मौजूदा समय में संचालन निलंबित होने और लीग की निरंतरता पर कोई निश्चितता नहीं होने के कारण कई क्लबों को पूरी तरह से बंद होने की वास्तविक संभावना का सामना करना पड़ रहा है।
अनिश्चितकाल के लिए रुका है आईएसएल का सत्र
एफएसडीएल ने एमआरए पर हस्ताक्षर नहीं होने का हवाला देते हुए 2025-26 सत्र को 11 जुलाई को अनिश्चितकाल के लिए रोकने की घोषणा की थी जिसके बाद मौजूदा स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके बाद कम से कम तीन क्लबों ने अपनी मुख्य टीम के संचालन को रोक दिया है या खिलाड़ियों और कर्मचारियों के वेतन को निलंबित कर दिया है। क्लबों ने लिखा, यह केवल प्रशासनिक गतिरोध नहीं है, बल्कि भारतीय फुटबॉल के लिए एक अस्तित्व का संकट है। हम आपको सबसे गंभीर परिस्थितियों में लिख रहे हैं। लीग की अनिश्चितता के कारण पिछले एक दशक से प्रशंसकों, प्रायोजकों, निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल निकायों के साथ बड़ी मेहनत से बनाया गया विश्वास पर खतरा मंडरा रहा है। इससे लीग को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।