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अपने स्वर्णिम अतीत की ओर लौट रहा है भारतीय फुटबॉल

Mon, 14 Aug 2017 02:47 AM IST
amarujala.com- Written by: नवीन चौहान
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अंडर-17 फुटबाल कोच का इस्तीफा
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आजादी के सत्तर साल पहले भारतीय फुटबॉल की दुनिया में जो पहचान थी वो पिछले छह दशक में वो घूमिल हो गई थी। आजादी के बाद 1956 में ओलंपिक में भारतीय फुटबाल टीम ओलंपिक सेमीफाइनल तक पहुंची थी। भारत ओलंपिक के सेमीपाइनल में पहुंचने वाली पहली एशियाई टीम थी।  भारत ने 1950 में फीफा वर्ल्ड कप के लिए भी क्ववालीफाई किया था लेकिन खिलाड़ियों के पैरों में जूते नहीं होने के कारण भारतीय टीम को मैदान पर उतरने नहीं दिया गया। 1951  से 1962 का दौर भारतीय फुटबॉल का सर्वश्रेष्ठ दौर था। इसके बाद धीरे-धीरे भारतीय फुटबाल अपने बुरे दौर में पहुंच गया।
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कई सालों तक फीफा रैंकिंग में टीम इंडिया 150 पायदान से पीछे पहुंच गई। दुनिया की टॉप 100 टीमों में शामिल होना भी उसके लिए लोहे के चने चबाने जैसा था। पिछले कुछ महीनों में जारी रैंकिंग में भारतीय टीम एक बार फिर अंडर 100 में जगह बनाने में कामयाब रही है। 

पिछले कुछ सालों में भारतीय फुटबाल जगत में व्यापक बदलाव हुआ है। पारंपरिक फुटबॉल कल्चर के इतर व्यावसायिक घरानों और फीफा के भारत में फुटबॉल के प्रसार में रुचि दिखाने का फायदा हुआ है। एक तरफ आईलीग की शुरुआत हुई तो वहीं दूसरी तरह इंडियन सुपर लीग की। इन दोनों स्पर्धाओं ने भारतीय फुटबाल के सुधार की दिशा में अच्छा काम किया है। 
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देश के युवा खिलाड़ियों को विश्व फुटबाल के पूर्व दिग्गज फुटबॉलरों के साथ खेलने और उनसे फुटबॉल की बारीकियां सीखने का मौका मिला है। जिसका फायदा भारत के युवा उठा रहे हैं। इससे इनके खेल में सुधार भी हो रहा है और वो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए भी खुद को तैयार कर रहे हैं। 

इसी साल अक्टूबर में भारत फीफा अंडर-17 विश्वकप की मेजबानी कर रहा है। देश भर के युवा खिलाड़ियों को पिछले कुछ सालों में चुनकर उन्हें कड़े और विश्वस्तरीय माहौल में प्रशिक्षित किया गया है। फुटबॉल के भारत में विकास के लिए इससे पहले इस तरह के प्रयास नहीं किए गए थे। भले ही टीम इंडिया के खिलाड़ी दिग्गज टीमों के खिलाफ जीत हासिल न कर सकें लेकिन उनके अंदर इस तरह की प्रतियोगिताओं में खेलने उसके लिए क्वालीफाइ करने की आग तो पैदा होगी। 

आईएसएस और विश्वकप के आयोजन के बाद देश में फुटबॉल के इंफ्रास्ट्रक्चर में भी सुधार हो रहा है। जो कि विश्वस्तरीय है। आईएसएस की शुरुआत से पहले भारत में फुटबॉल के विश्वस्तरीय स्टेडियम के नाम पर कोलकाता का साल्ट लेक स्टेडियम ही था लेकिन अब ऐसे स्टेडियम्स की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। 

दुनिया के मैनचेस्टर यूनाइटेड, एटलेटिको,  रियाल मैड्रिड और बार्सिलोना जैसे क्लब भारत में प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना कर युवाओं को प्रशिक्षित कर रहे हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। 

आज भारत फीफा रैंकिंग में 97 वें पायदान पर है। फीफा रैंकिंग की शुरुआत के बाद से भारत की औसत रैंकिंग 133 रही है। साल 2012 में भारत अपनी सबसे खराब 166वें पायदान पर पहुंच गया था लेकिन पिछले पांच साल में हुए सुधार का असर दिख रहा है और भारत 97वें स्थान तक पर पहुंच गया है। जहां उसका साथ जिंबाब्वे और इस्टोनिया जैसे देश दे रहे हैं। 1993 में भारत 100वें पायदान पर था। इसका मतलब हम धीरे-धीरे ही सही लेकिन फुटबॉल के स्वर्णिम अतीत की तरफ बढ़ रहे हैं। 
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