राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के मुख्य कोच इगोर स्टिमक इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) और आई लीग मैचों में अधिक विदेशी खिलाड़ियों को उतारने के नियम से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह भविष्य के सुनील छेत्री तैयार करने की राह में रोड़ा है।
स्टिमक ने कहा कि आईएसएल और आई लीग को एशियाई फुटबाल परिसंघ (एएफसी) की नीति का अनुसरण करना चाहिए जिसमें एक मैच में अधिकतम चार विदेशी खिलाड़ियों को उतारा जा सकता है। भारतीय लीग में पांच विदेशी खिलाड़ियों को उतारा जा सकता है।
स्टिमक ने कहा, 'देश के शीर्ष टियर के लीग के लिए मेरा सुझाव है कि वे एएफसी के 3+1 के नियमों का पालन करे। यह विदेशी खिलाड़ियों के लिए मूल नियम है। अधिकतर सफल एशियाई देश इस नियम को अपनाते हैं, इसलिए उनके पास राष्ट्रीय टीम के लिए स्ट्राइकर, मिडफील्डर और सेंटर बैक के विकल्प होते हैं।'
दोनों लीगों का विलय आदर्श होगा
स्टिमक ने कहा, ‘आई लीग में हमारे पास (भारतीय) स्ट्राइकर नहीं हैं। केवल इंडियन एरोज की तरफ से स्ट्राइकर विक्रम प्रताप सिंह खेलते हैं। यह हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या है। हमें राष्ट्रीय टीम के पक्ष में चीजों को बदलने की जरूरत है। ’ इस क्रोएशियाई ने कहा, ‘इन दोनों लीग (आईएसएल और आईलीग) का विलय करना आदर्श होगा।’
भारतीय कोच स्टिमक
अगर यही स्थिति रही तो हम कभी छेत्री का विकल्प नहीं ढूंढ पाएंगे। हम उस खिलाड़ी को नहीं ले सकते जो कभी स्ट्राइकर के तौर पर नहीं खेला हो। मैं स्ट्राइकर कहां से ढूंढ कर लाऊं। यहां तक कि आई लीग में भी पांच विदेशी खिलाड़ियों का नियम लागू है।’-