लक्ष्मण अवार्डी फुटबॉलर ने सरकार की 'खेलो इंडिया' योजना को कारगर बताया, लेकिन यहीं जोड़ा कि चाहे जो खेल हो, खिलाड़ियों की नींव मजबूत करनी होगी। आज देश में बहुत से ऐसे खिलाड़ी हैं जो छोटे कस्बों, गांवों से आकर दिग्गजों को धूल चटा रहे हैं। सरकार को अगर अच्छे खिलाड़ी तैयार करने हैं तो स्कूलों में खेल को अनिवार्य करना होगा। ज्यादा प्रतियोगिताएं करानी होंगी।
संतोष ट्रॉफी में चार राज्यों (यूपी, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और रेलवे) से खेल चुके यूपी के एकमात्र फुटबॉलर मुश्ताक ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार को हर जिले में एक स्टेडियम बनवाना चाहिए ताकि खिलाड़ियों को अभ्यास और टूर्नामेंट मिल सकें।
उन्होंने आगे कहा कि, 'अगर हम फुटबॉल की ही बात करें तो इतना बड़ा स्टेट है यूपी पर यहां केवल मल्टीपरपज ग्राउंड हैं, जहां तमाम खेल होते रहते हैं, जबकि दिल्ली, कोलकाता, गोवा में ऐसा नहीं है। संसाधन जुटाने पर सरकार को गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। अब तो कई कॉर्पोरेट घराने आगे आने लगे हैं। ऐसे लोगों को और जोड़ना चाहिए।
मोहम्मडन स्पोर्टिंग (1994-95) के पूर्व कप्तान और मोहन बागान, ईस्ट बंगाल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मुंबई, पश्चिम रेलवे से खेल चुके मुश्ताक कुछ पुराने खिलाड़ियों के साथ खुद आसपास के जिलों के गांवों से फुटबॉलरों को तराशने में जुटे हैं। यूपी सॉकर कन्फेडरेशन के अध्यक्ष के तौर पर भी वे प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे ला रहे हैं।
साई के स्पोर्टस हॉस्टल और स्पोर्ट्स कॉलेज की चयन समिति के सदस्य रह चुके मुश्ताक ने कहा कि जब हॉस्टल और कॉलेज से खिलाड़ी निकलता है तो वह कहां जाए? जिन खिलाड़ियों का सरकार ने इतने वर्षों तक खेलने, पढ़ने का पूरा खर्च उठाया, उनके लिए भी तो कोई जॉब होना चाहिए जहां से वह खेल सके, साथ ही अपने परिवार की देखभाल कर सके।
आगरा में 20 से 30 सितंबर तक होने जा रही 46वीं एशियाई स्कूली फुटबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी। इसके लिए देशभर से 125 खिलाडिय़ों को चुना गया है। इनका कैंप लगाया जाएगा। इसके बाद फाइनल टीम चुनी जाएगी।
टूर्नामेंट में कोरिया, इंडोनेशिया, चीन, श्रीलंका जैसे देश भाग ले रहे हैं। खुद 13वीं चैंपियनशिप (1983) में बतौर उपकप्तान भाग ले चुके मुश्ताक अली ने अपने देश में एशियाई चैंपियनशिप के आयोजन को अच्छा संकेत बताया।