बता दें कि हाल में बहुत अधिक संख्या में मछली पकड़ने के मामलों के कारण तुइचांग नदी चर्चा में आई थी। इसके बाद स्थानीय लोगों को नदी पर लगातार नजर रखने के लिए बाध्य होना पड़ा है। गश्त लगाने वालों में भारतीय टीम और एससी ईस्ट बंगाल के फारवर्ड जेजे लालपेखलुआ भी शामिल हैं।
फुटबॉल के मैदान से दूर भारतीय टीम के स्ट्राइकर जेजे लालपेखलुआ अपने राज्य मिजोरम में तुइचांग नदी के आसपास गश्त लगा रहे हैं। वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं जिससे कि लोगों को बहुत अधिक संख्या में मछली पकड़ने से रोका जा सके और स्थानीय मछुआरों की जीविका में मदद हो सके।
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उल्लेखनीय है कि इस काम के लिए इस फुटबॉलर ने अपने गांव मॉडल वेंग हनाहथियाल में कई युवाओं के साथ मिलकर एक समूह तैयार किया है। इस समूह के सदस्य दिन-रात गश्त लगाकर अपने घरों के समीप बहने वाली नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने में मदद कर रहे हैं।
लालपेखलुआ ने 'द एआईएफएफ डॉट कॉम' से कहा, 'पिछले कई वर्षों से बेहद अधिक संख्या में मछली पकड़ने से तुइचांग नदी में मछलियों की संख्या काफी कम हो गई है। यह स्थानीय मछुआरों के लिए भी बड़ी समस्या बन रही है जो आजीविका के लिए नदी पर निर्भर हैं। ’’
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उल्लेखनीय है कि मॉडल वेंग के स्थानीय लोगों ने तुइचांग के किनारे 500 मीटर के क्षेत्र की पहचान की है जिसे मछलियों के अंडे देने का स्थान माना जाता है। इस इलाके में अलग-अलग पालियों में 24 घंटे गश्त की जा रही है जिससे कि लोगों को अधिक संख्या में मछलियां पकड़ने से रोका जा सके।
छोटे कदम से ही दिख रहे सकारात्मक नतीजे
लालपेखलुआ ने कहा, 'पिछले साल से हम सभी बारी बारी इस इलाके में गश्त लगाते हैं जिससे सुनिश्चित हो सके कि इलाके में कोई मछली न पकड़ पाए। यह बेहद अहम है कि मछलियों को कम से कम उनके प्रजनन के इलाके में अकेला छोड़ दिया जाए। इस छोटे से कदम से ही हमें नतीजे दिख रहे हैं।'
लालपेखलुआ का जन्म सात जनवरी 1991 को हुआ था। वह मुख्यत: सेंटर फॉरवर्ड पर खेलते हैं। उन्होंने आईएसएल (इंडियन स्पोर्ट्स लीग) का प्लेयर ऑफ द सीजन खिताब अपने नाम किया था और 2015 में एफपीएआई फुटबॉल प्लेयर ऑफ द इयर भी बने थे।