लोगों को इस पर हैरानी तो होनी ही थी। क्लिफिन के दोस्तों को भी उन पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन वह साइकिल से जाने का फैसला कर चुके थे। 23 फरवरी 2018 को उन्होंने अपनी यह मुश्किल, पर रोमांचक यात्रा शुरू की। इसके लिए वह पहले फ्लाइट से दुबई गए और फिर समुद्र के रास्ते ईरान। यहां से वह अपनी साइकिल पर सवार होकर निकल पड़े।
साइकिल से ईरान से रूस की दूरी अब भी 4200 किलोमीटर थी, लेकिन उन्हें खुशी थी इस पूरी मेहनत के बाद मिलने वाले नतीजे की यानी अपने पसंदीदा फ़ुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी से मिलना। क्लिफिन कहते हैं, 'मुझे साइकिल चलाना बहुत पसंद है और मैं फुटबॉल को लेकर पागल हूं और यहां मैंने अपने दो जुनूनों को एक साथ मिला दिया है।'
क्लिफिन पहले पाकिस्तान जाने वाले थे, लेकिन फिर भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण रिश्तों को देखते हुए उन्होंने रास्ता बदल दिया। हालांकि, उनको इसका काफी नुकसान भी हुआ। उन्होंने बताया कि प्लान बदलने के चलते उन्हें काफी खर्च उठाना पड़ा, वह दुबई अपनी साइकिल नहीं ले जा सकते थे, इसलिए उन्हें वहां करीब 47,000 रुपये में नई साइकिल खरीदनी पड़ी।
लंबी दूरी की यात्रा के लिए वो बहुत अच्छी साइकिल नहीं थी, लेकिन वो बस वही खरीद सकते थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने 11 मार्च को ईरान के बंदरगाह बंदर अब्बास में प्रवेश किया तो उनका अफसोस खत्म हो गया। वह कहते हैं, 'यह दुनिया में सबसे ज्यादा खूबसूरत देश है और यहां के लोग बहुत अच्छी मेहमान नवाजी करते हैं। मैंने वहां 45 दिन बिताए और सिर्फ दो दिनों के लिए ही होटल में रहना पड़ा।'
क्लिफिन के पास हर दिन खर्च करने के लिए सिर्फ 680 रुपये थे, लेकिन वह ईरान में जहां भी गए सभी ने उन्हें अपने घर में रहने और खाना खाने का न्योता दिया। क्लिफिन कहते हैं, 'ईरान को लेकर मेरी सोच बिल्कुल बदल गई। मुझे एहसास हुआ कि किसी देश की भू-राजनीति के हिसाब से हमें उसके बारे में राय नहीं बनानी चाहिए।
वहां के लोगों ने मुझसे वादा लिया कि मैं फ़ुटबॉल विश्व कप में ईरानी टीम के लिए चीयर करूंगा, उन्हें बॉलीवुड से प्यार है और इस बात ने मुझे कई जगह लोगों से घुलने-मिलने में मदद भी की।
अगला पड़ाव अजरबैजान था, जहां उन्हें सीमा पर अपनी यात्रा दस्तावेजों को लेकर कुछ मुश्किल हुई क्योंकि लगातार साइकिल चलाने से क्लिफिन का वजन काफी कम हो गया था। क्लिफिन कहते हैं, 'वजन कम होने से मेरा चेहरा काफी बदल गया था और मैं पासपोर्ट में लगी तस्वीर से अलग दिख रहा था। पुलिस को मेरी पहचान की जांच करने में आठ घंटे लग गए, लेकिन उनका व्यवहार अच्छा था।'
अजरबैजान में होटल में रहने के लिए क्लिफिन के पास पैसे नहीं थे, इसलिए वो जगह-जगह पार्क में टेंट लगाकर रहे। क्लिफिन ने बताया, 'यहां के लोग बहुत अच्छे हैं, लेकिन खुलने में थोड़ा वक्त लेते हैं। मुझे राजधानी बाकू में कुछ भारतीय भी मिले और मैं कुछ देर उनके साथ रहा भी।'
जॉर्जिया पहुंचकर क्लिफिन के सामने एक नई मुश्किल आ गई, उन्होंने बताया, 'मेरे पास सभी दस्तावेज थे, लेकिन पता नहीं उन्होंने मुझे क्यों नहीं जाने दिया। इसने मुझे मुश्किल में डाल दिया क्योंकि मेरे पास अजरबैजान के लिए सिर्फ एक ही एंट्री-वीजा था।'
अब क्लिफिन एक दिन के लिए जॉर्जिया और अजरबैजान के बीच 'नो मैन्स लैंड' में फंस गए। हालांकि, फिर से उन्हें अजरबैजान में प्रवेश के लिए तुरंत वीजा मिल गया। क्लिफिन ने बताया, 'अब मुझे रूस जाने का दूसरा रास्ता खोजना था। किसी ने बताया कि अजरबैजान की सीमा रूस के दागेस्तान क्षेत्र से लगती है। वह जगह सुरक्षित है या नहीं ये न सोचते हुए मैं वहां गया। उस वक्त मेरे पास कोई और रास्ता नहीं था।'
क्लिफिन 5 जून को दागेस्तान पहुंचे। यहां भाषा उनके लिए बहुत बड़ी समस्या बन गई क्योंकि लोग मुश्किल से ही अंग्रेजी बोलते थे। लोग उन्हें देखकर काफ़ी हैरान भी थे। क्लिफिन ने कहा, 'लोग एक भारतीय को साइकिल पर देखकर बहुत हैरान थे। यहां भी उन्होंने फुटबॉल और फिल्म की सार्वभौमिक भाषा के जरिए लोगों से पहचान बढ़ाई।'
क्लिफिन अब तंबोव पहुंच गए हैं जो रूस की राजधानी मास्को से 460 किलोमीटर दूर है। उन्हें फ्रांस और डेनमार्क के मैच के लिए किसी भी तरह 26 जून को मॉस्को पहुंचना है। वह कहते हैं, 'यह अकेला ऐसा मैच है जिसके लिए मुझे टिकट मिला है। लेकिन, मैं अर्जेंटीना और लियोनेल मेसी का फैन हूं। मैं मेसी की पूजा करता हूं। उनसे मिलना और मेरी साइकिल पर उनका ऑटोग्राफ लेना मेरा सपना है।'
क्लिफिन को उम्मीद है कि उनकी यात्रा दूसरों को भी प्रेरणा देगी। वह चाहते हैं कि किसी दिन भारत भी विश्व कप में हिस्सा ले। वहीं, साइक्लिंग को लेकर क्लिफिन कहते हैं, 'साइकिल चलाना आपको जीवन की प्राथमिक जरूरतों की तरफ ले जाता है। मतलब आपके लिए सबसे ज्यादा क्या जरूरी है जैसे अच्छा खाना, नहाना और टेंट लगाने के लिए अच्छी जगह। इतने में आप खुश हो जाते हैं। मुझे बहुत खुशी होगी अगर मेरी यात्रा से एक भी बच्चे को फ़ुटबॉल खेलने की प्रेरणा मिलती है।'