फीफा विश्व कप में चार बार की विजेता, चार बार की उपविजेता, पांच बार की सेमीफाइनलिस्ट और तीन बार की क्वार्टर फाइनलिस्ट, निरंतरता के हिसाब से विश्व कप मके इतिहास में जर्मनी जितनी सफल कोई और दूसरी टीम नहीं हुई हैं। विडंबना यह है कि गत विजेता जर्मनी का अंतिम-16 में पहुंचना अब तक निश्चित नहीं हैं।
कोरिया के खिलाफ बुधवार को जब जोकिम लो की टीम अपने अंतिम ग्रुप मुकाबले में उतरेगी तो उसे हर हाल में बड़े अंतर से जीत तो चाहिए ही होगी साथ में बाग्य के साथ की जरुरत पड़ेगी। हालांकि, टोनी क्रुज ने अंतिम सेकंडों में गोल कर स्वीडन के खिलाफ जिस तरह से जीत दिलाई उससे पूरे जर्मनी को हौसला हो चला है कि उनकी टीम पहले दौर में बाहर नहीं होगी। विश्व कप के इतिहास में सिर्उ एक मौका आया 1938 में आया है जब जर्मनी का कारंवा दूसरे दौर तक नहीं पहुंच सका।
बता दें कि 80 वर्षों में कभी पहले दौर से बाहर नहीं हुई हैं चार बार की विश्व विजेता जर्मनी। बहरहाल, जर्मनी को यदि अपने विश्व कप खिताब की उम्मीदों को जिंदा रखना है, तो उसे अपने आखिरी ग्रुप मैच में दक्षिण कोरिया के बड़े अंतर से हराना होगा। क्योंकि अंतिम-16 तक का सफर तय करने के लिए उनकी उम्मीदें सिर्फ अपने प्रदर्शन पर नहीं बल्कि दूसरी टीमों पर भी निर्भर रहेंगी।
हालांकि, दक्षिण कोरिया के खिलाफ अंतिम ग्रुप मैच मौजूदा विजेता जर्मनी के लिए मुश्किल नहीं माना जा सकता है, क्योंकि दक्षिण कोरिया की टीम ने एक भी मैच में जीत हासिल नहीं की है और वह पहले ही विश्व कप से बाहर हो चुकी है। इस मुकाबले में उसका लक्ष्य जीत के साथ सम्मानपूर्वक अपने विश्व कप अभियान का समापन करना होगा।