जमीनी पासिंग और कोच के इशारे पर नाचना, इसके दर्शन टेलीविजन पर यूरोपीय फुटबाल में ही देखने को मिलते हैं। भारतीय फुटबाल इस कलाकारी से अछूती ही रही है, लेकिन जिस अंदाज में अंडर-17 वर्ल्ड कप खेलने जा रही भारतीय टीम ने गुरुग्राम की कॉन्सिएंट फुटबाल अकादमी में बुधवार को अपने पहले अभ्यास सत्र में उतरी। उससे उम्मीद की किरण जगती दिखाई देने लगी है। पुर्तगाली कोच लुई नार्टन डि माटोस भारतीय युवाओं को टेक्निकल ट्रेनिंग और सेट पीस पर जोर देते दिखाई दिए।
इस मैदान पर कोलंबियाई टीम भी प्रैक्टिस कर रही है, लेकिन मेजबान होने के बावजूद भारतीय टीम शाम चार बजे से दिन की रोशनी में प्रैक्टिस करने उतरी। फ्लडलाइट में प्रैक्टिस का समय कोलंबियाई टीम ने पहले ही हासिल कर लिया है। इसके विपरीत माटोस के संरक्षण में भारतीय फुटबालरों को जमीनी पासिंग करते देखना सुखद अहसास से कम नहीं था। खास बात यह रही है कि डेंगू की बीमारी से घिरने वाले मिडफील्डर जैकसन सिंह भी लय में नजर आए। उन्हें बीते दिनों डेंगू के चलते अस्पताल में दाखिल होना पड़ा था। पूरी टीम ने एक दूसरे को आवाजें देकर और कोच के निर्देशों को सुनकर जमकर पसीना बहाया।
भारत को अमेरिका के खिलाफ छह अक्तूबर को अपना पहला मुकाबला खेलना है। माटोस भी इस अनुभव को लेकर गदगद हैं। वह कहते हैं कि भारतीय फुटबॉल के लिए यह बेहद रोमांचक क्षण होगा। वह हर व्यक्ति जो इससे जुड़ा है उसे इस पर फख्र होना चाहिए। फीफा अंडर-17 विश्व कप के हर खिलाड़ी के लिए बड़ा क्षण है। ये सभी फीफा अंडर 17 विश्व कप में खेलने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनने जा रहे हैं।