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ब्राजील के वो लोग जो फुटबॉल से कोसों दूर हैं

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ब्राजील में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जिन्हें फुटबॉल में दिलचस्पी नहीं है। और ये उन लोगों में शामिल नहीं हैं जो सड़कों पर उतरकर ब्राजील में फुटबॉल वर्ल्ड कप आयोजन का विरोध कर रहे हैं।
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ये वो लोग हैं जो टीवी के सामने बैठकर या स्टेडियम जाकर फुटबॉल मैच देखने में 90 मिनट बर्बाद करना पसंद नहीं करते हैं।

ये वो लोग हैं जो इसके बजाए केक बनाना, समंदर की लहरों पर मचलना, अपने कुत्ते को टहलाना, पसंदीदा फिल्म देखना और कुछ नहीं तो सोना पसंद करते हैं।

यहां हम आपकी मुलाकात 5 ऐसे लोगों से करा रहे हैं जो इस धारणा को तोड़ रहे हैं कि ब्राजील में हर कोई फुटबॉल का दीवाना है।

विक्टर पवान
विक्टर एक छात्र हैं। उनकी उम्र 18 वर्ष है और वे साओ पाअलो में रहते हैं। वे कहते हैं, ''ये कोई राजनीतिक चीज नहीं हैं। फुटबॉल मुझे जरा भी पसंद नहीं है। जब में छोटा था, मैंने खेलने की कोशिश की थी। लेकिन मैं इसमें अच्छा नहीं था। अब मैं लोगों से कहता हूं कि मुझे फुटबॉल पसंद नहीं है।''

विक्टर का मानना है कि चूंकि वे पुरुष हैं, इसलिए हर किसी को लगता है कि उन्हें फुटबॉल में दिलचस्पी होगी।

वे कहते हैं, ''मुझे इसकी परवाह नहीं है। मैं तो किसी स्थानीय टीम को सपोर्ट भी नहीं करता हूं। हां, मेरी गर्लफ्रेंड को फुटबॉल से प्यार है। वो वर्ल्ड कप का हर मुक़ाबला देखती है लेकिन मैं घर में बैठकर पढ़ना या फिल्म देखना पसंद करता हूं।''
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लुकास केन्यो
साओ पाअलो स्टेट में रहने वाले 39 वर्षीय लुकास पेशे से एक आर्किटेक्ट हैं। वे कहते हैं, ''इस वर्ल्ड कप के दौरान मैंने एक भी मैच नहीं देखा और मैं कोई मैच देखूंगा भी नहीं। सोमवार को जब एक बार फिर ब्राजील का मैच होगा, मैं हर दिन की तरह काम पर जाऊंगा।''

लेकिन ब्राजील में फुटबॉल वर्ल्ड कप के खुमार से बचना आसान नहीं है। वे कहते हैं, ''मैं यदि कैब लेता हूं तो उसका ड्राइवर रेडियो पर किसी मैच की कमेंट्री सुन रहा होता है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि ब्राजील खेल रहा है या नहीं। किसी कैफे या रेस्तरां में जाओ तो वहां भी यही नजारा होता है।''

रॉबर्ट मिलाजो
42 वर्षीय रॉबर्ट पेशे से प्रबंधक हैं और रियो दि जनेरो में रहते हैं। फुटबॉल के बारे में उनकी राय है, ''जब ब्राजील खेलता है, मैं लहरों का लुत्फ उठाने समंदर किनारे चला जाता हूं।''

रॉबर्ट कहते हैं कि पिछले फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान भी उन्होंने ऐसा ही किया था। वे कहते हैं, ''इस समय बीच लगभग खाली होते हैं। समंदर में कोई नहीं होता। ब्राजील में फुटबॉल पर बहुत अधिक ध्यान दिया जाता है लेकिन बाकी खेलों पर जरा भी ध्यान नहीं दिया जाता है। यह बात मुझे बहुत निराश करती है। इस देश में कई चीजें बेहतर करने की जरूरत है। फुटबॉल उनमें से एक नहीं है।''

एलिजा नजारिएन
एलिजा पेश से लेखक हैं। उनकी उम्र 65 साल है और वे भी साओ पाअलो स्टेट में रहती हैं। वे कहती हैं, ''मुझे अच्छा लगता है जब खिलाड़ी मैदान में आते हैं, राष्ट्रगीत की धुन बजती है लेकिन जैसे ही मैच शुरू होता है, मैं टीवी बंद कर देती हूं। फुटबॉल मुझे जरा भी पसंद नहीं है।''

एलिजा ने आखिरी बार वर्ष 1970 में वर्ल्ड कप के मुकाबले देखे थे और इसके बाद उनकी दिलचस्पी जाती रही। उन्हें लगता है कि यह खेल अब धन-दौलत तक सीमित होकर रह गया है।

वे कहती हैं, ''इस वर्ल्ड कप में ब्राजील के पहले दो मैचों के दौरान मैंने अपने कुत्ते को टहलाना पसंद किया। वर्ल्ड कप के शोर-शराबे से कुत्ते भी तनाव में आ जाते हैं।'' एलिजा ने इससे पहले के वर्ल्ड कप आयोजनों के दौरान अपने अनुभवों के आधार पर एक लघुकथा भी लिखी है।

लिजा गेलवाओ
साओ जोस डोस कैम्पोस में रहने वाली लिजा कहती हैं, ''ब्राजील के पिछले मैच में जब मेरा पूरा परिवार मुकाबले का आनंद उठा रहा था, मैं केक बनाने में व्यस्त थी और मुझे इसमें मजा आया।''

लिजा कहती हैं कि उन्हें अपने 7 साल के बेटे को समझाना पड़ा कि क्यों वह ब्राजील की टीम को सपोर्ट नहीं करती हैं। वे इसकी वजह बताती हैं, ''पहली वजह तो राजनीतिक है। मुझे पूरा भरोसा है कि यदि ब्राजील वर्ल्ड कप जीत जाता है तो सत्तारूढ़ पीटी पार्टी इसका राजनीतिक फायदा उठाएगी। इस साल चुनाव जो होने हैं।''

लिजा को यह बात भी अच्छी नहीं लगती है कि ब्राजील में फुटबॉल और अन्य खेलों के बीच फासला बहुत अधिक है। उनका मानना है कि देश में कई प्रतिभावान खिलाड़ी हैं लेकिन उन्हें किसी तरह की मदद नहीं मिलती है।
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