भारतीय खिलाड़ियों को नंगे पैर या मोजे डालकर खेलने की आदत थी। भारतीय टीम के खिलाड़ी 1948 विश्व कप में भी नंगे पैर और कुछ मोजे डालकर खेले थे। भारतीयों की इस शैली ने दुनिया भर का ध्यान अपनी और खींचा था। फीफा ने पहले ही यह शर्त रखी थी कि उन्हें जूते पहनकर खेलना होगा।
एशिया से मात्र एक टीम क्वालिफाई करनी थी। इंडानेशिया, फिलिपींस और बर्मा ने क्वालिफाइंग दौर से पहले ही नाम वापस ले लिया था। ऐसे में भारत को सीधे ब्राजील का टिकट मिल गया पर जूतों ने खिलाड़ियों से खेलने का हक छीन लिया।
पहले विश्व कप के विजेता उरुग्वे ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित की। यह एकमात्र विश्व कप था, जिसमें विजेता का फैसला चार टीमों के बीच हुए फाइनल राउंड के जरिये हुआ। उरुग्वे ने फाइनल ग्रुप के पहले मैच में स्पेन से 2-2 से ड्रॉ खेला, दूसरे में स्वीडन को 3-2 से मात दी और तीसरे में ब्राजील को 2-1 से हराकर दूसरी बार ट्रॉफी पर कब्जा किया। ब्राजील दूसरे, स्वीडन तीसरे और स्पेन चौथे स्थान पर रहा।
खास बातें
फीफा विश्व कप कब से कब तक : 24 जून से 16 जुलाई (ब्राजील, 1950)
टीमें : 13, मैच : 22, गोल : 88
- 08 गोल दागकर मेजबान ब्राजील के एडमिर ने गोल्डन बूट का खिताब जीता
- 02 हैट्रिक लगी टूर्नामेंट में, जिसमें से एक उरुग्वे के ओस्कर ओमार मिगेज ने और एक ब्राजील के एडमिर ने लगाई
- 8-0 की सबसे बड़ी जीत टूर्नामेंट में उरुग्वे ने बोलीविया पर दर्ज की
- विश्व युद्ध के चलते 12 वर्ष बाद हुए इस वैश्विक टूर्नामेंट के लिए भारत को सीधे मिला था प्रवेश